सुलगता उत्तर भारत: मई 2026 का महीना उत्तर भारत के इतिहास में मौसम के सबसे क्रूर अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। दोपहर होते ही सड़कें रेगिस्तान जैसी सुनसान हो जाती हैं, बाजार वीरान पड़ रहे हैं और अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड हीट स्ट्रोक (लू) के मरीजों से पट चुके हैं। बुंदेलखंड के बांदा में बीती 18 मई को दर्ज हुआ तापमान पिछले 75 वर्षों के इतिहास में इस तारीख का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। यह सिर्फ मौसम का बदलना नहीं, बल्कि एक गंभीर ‘क्लाइमेट इमरजेंसी’ की चेतावनी है।
सुलगते उत्तर भारत के 4 बड़े कारण: क्यों भट्टी बना मैदान?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जानलेवा गर्मी के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि कई भौगोलिक और मौसमी कारक एक साथ काम कर रहे हैं:
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कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और पछुवा का टॉर्चर: उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय सूखी पश्चिमी हवाएं तांडव मचा रही हैं। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ों से ठंडी हवाएं नहीं आ पा रही हैं, जिससे अगले 72 घंटों तक पारा और चढ़ने के आसार हैं।
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‘डबल अटैक’ – लू के साथ धूल का गुबार: राजस्थान और पश्चिमी यूपी में 50 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी धूलभरी आंधियां चलने की आशंका है। एक तरफ झुलसाने वाला तापमान और दूसरी तरफ आंधी के कारण कम विजिबिलिटी और सांस की बीमारियां, आम जनता के लिए दोहरी मार साबित हो रही हैं।
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El-Nino का साया: IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति सक्रिय हो रही है। यही वजह है कि मॉनसून से ठीक पहले की यह गर्मी इतनी लंबी और तीखी हो गई है।
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समंदर से दूरी और थार की रेत: उत्तर भारत के मैदान समुद्र से काफी दूर हैं, जिससे यहाँ तटीय नमी नहीं पहुँच पाती। इसके विपरीत, राजस्थान की तपती रेत से उठने वाली गर्म हवाएं बिना किसी रुकावट के सीधे यूपी के मैदानों को भट्टी में तब्दील कर देती हैं।
यूपी का हाल: बांदा में पारा 48°C पार, क्यों तप रहा है बुंदेलखंड?
उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 48 डिग्री सेल्सियस को छू चुका है। इससे पहले अप्रैल के आखिरी हफ्ते में भी यहाँ तापमान 47.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था। बुंदेलखंड के इस कदर तपने के पीछे ठोस भौगोलिक कारण हैं:
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वनों का खात्मा: इस क्षेत्र में हरियाली और वनाच्छादन बेहद कम (कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र 2.31%) है।
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पथरीली जमीन का ‘रेडिएशन’: यहाँ की सूखी और पथरीली जमीन दिनभर सूरज की गर्मी को सोखती है और रात में उसे वापस छोड़ती है, जिससे एक ‘अर्बन हीट आइलैंड’ जैसा दमघोंटू माहौल बन जाता है।
वर्तमान में प्रयागराज और आगरा मंडल में मौसम विभाग ने ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। यूपी में 24 मई तक गंभीर से अति-गंभीर हीटवेव का अलर्ट जारी है।
ग्राउंड जीरो की हकीकत: रात में खेती, दिहाड़ी छोड़ने को तैयार मजदूर
News Drift के जमीनी विश्लेषण के अनुसार, इस गर्मी ने इंसानी लाइफस्टाइल को पूरी तरह बदल दिया है।
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रात में खेती: बुंदेलखंड के कई हिस्सों में किसान अब दिन के बजाय रात में LED फ्लडलाइट्स की रोशनी में खेतों में काम कर रहे हैं।
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40% मजदूरी छोड़ने को तैयार: कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले मजदूर सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच काम करने के बजाय अपनी दिहाड़ी का 40% हिस्सा छोड़ने को तैयार हैं, क्योंकि इस धूप में काम करना जानलेवा है।
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बाजारों का समय बदला: दोपहर के बिजनेस पूरी तरह ठप हैं। खाने-पीने के स्टॉल और दुकानें अब सिर्फ सूरज डूबने के बाद ही खुल रही हैं।
राहत कब? जानिए मॉनसून 2026 का पूरा शेड्यूल
राहत की बात यह है कि इस बार केरल में मॉनसून समय से पहले आ रहा है, लेकिन उत्तर भारत को अभी लंबा इंतजार करना होगा।
