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Home»राज्य»उत्तरप्रदेश»यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी मजबूती, पांच जिलों में डंपिंग यार्ड निर्माण के लिए 6.03 करोड़ मंजूर
उत्तरप्रदेश

यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी मजबूती, पांच जिलों में डंपिंग यार्ड निर्माण के लिए 6.03 करोड़ मंजूर

NDMBy NDMAugust 8, 2026No Comments3 Mins Read
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यूपी में परिवहन प्रवर्तन को मिलेगी मजबूती, पांच जिलों में डंपिंग यार्ड निर्माण के लिए 6.03 करोड़ मंजूर
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परिवहन प्रवर्तन: उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में सरकार ने डिटेंशन (डंपिंग) यार्डों के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी क्रम में पांच जिलों में निर्माण कार्य को गति देने के लिए कार्यदायी संस्था सीएनडीएस (C&DS) को 6.03 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई है।

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बुलंदशहर, शामली, शाहजहांपुर, पीलीभीत और बाराबंकी में डिटेंशन यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। इनमें बाराबंकी, पीलीभीत और शाहजहांपुर के लिए निर्माण कार्य की दूसरी एवं अंतिम किश्त जारी की गई है। बाराबंकी को 1.62 करोड़ रुपये, पीलीभीत को 1.44 करोड़ रुपये और शाहजहांपुर को 1.34 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इस राशि में लगभग 16 लाख रुपये मिट्टी भराई के कार्य के लिए भी शामिल किए गए हैं। विभाग ने बताया कि स्वीकृत धनराशि कार्यदायी संस्था के खाते में हस्तांतरित की जा रही है।

लखनऊ और औरैया में भी तैयारियां तेज

राजधानी लखनऊ और औरैया में भी डिटेंशन यार्ड निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों जिलों में निर्माण के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध करा दी गई है। लखनऊ के लिए 2.55 करोड़ रुपये और औरैया के लिए 4.07 करोड़ रुपये की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के बाद संबंधित राशि कार्यदायी संस्था को उपलब्ध करा दी गई है।

इसके अलावा उन्नाव और अलीगढ़ में भी जमीन उपलब्ध होने के बाद परियोजना का विस्तृत अनुमान तैयार किया गया है। तकनीकी समिति इसकी जांच पूरी कर चुकी है और अब प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाएगा।

डिटेंशन यार्ड की जरूरत क्यों पड़ी?

अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में प्रवर्तन अभियान के दौरान जब्त किए गए वाहनों को रखने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। अधिकांश थानों में जगह की कमी के कारण कई बार वाहन जब्त करने के बजाय केवल चालान की कार्रवाई कर उन्हें छोड़ना पड़ता है। इससे प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई प्रभावित होती है।

उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति ने भी मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन यार्ड विकसित करने की सिफारिश की थी, ताकि जब्त वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखा जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

क्या होगा फायदा?

डिटेंशन यार्ड बनने के बाद जब्त वाहनों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा। इससे थानों पर दबाव कम होगा और सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय तक खड़े रहने वाले जब्त वाहनों की समस्या भी घटेगी। साथ ही वाहनों का रिकॉर्ड रखने, निगरानी करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में भी परिवहन विभाग को सुविधा मिलेगी।

अधिकारियों का मानना है कि मंडलीय मुख्यालयों पर डिटेंशन यार्ड विकसित होने के बाद परिवहन प्रवर्तन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक संगठित, प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी।

परिवहन प्रवर्तन
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