राजधानी में मौसम बदलने के साथ ही स्वाइन फ्लू पैर पसारने लगा है। पिछले एक महीने के भीतर तीन और लोग इस संक्रमण की चपेट में आ गए हैं, जिससे जनवरी से अब तक लखनऊ में पुष्टि हो चुके मरीजों का आंकड़ा 13 पर पहुंच गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से ज्यादातर मरीज पहले सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर सरकारी अस्पतालों में पहुंचे थे, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर हुई एलाइजा जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो गई।
स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन अब मरीजों पर करीबी नजर रखने के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, मौसम में उतार-चढ़ाव के इस दौर में वायरल संक्रमण के मामले सामान्यतः बढ़ जाते हैं, इसलिए लक्षणों को हल्के में लेने से बचना चाहिए।
हर सर्दी-जुकाम स्वाइन फ्लू नहीं, पर सतर्कता जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआत में स्वाइन फ्लू के लक्षण आम सर्दी-जुकाम जैसे ही दिखते हैं, इसलिए भ्रम की स्थिति बन जाती है। हालांकि हर सर्दी-जुकाम को स्वाइन फ्लू मान लेना गलत है, फिर भी अगर लक्षण लगातार बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें — खासकर बुजुर्गों में — तो समय रहते जांच कराना जरूरी हो जाता है। संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के जरिए निकलने वाली बूंदों से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है।
शहर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत निर्वाण के अनुसार बीते दो महीनों में छह और मरीजों में संक्रमण की आशंका जताई गई है, जिनकी जांच चल रही है। संवेदनशील इलाकों की पहचान की जा रही है और सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा उपलब्ध है। उनका कहना है कि एलाइजा जांच के जरिए स्वाइन फ्लू की सबसे सटीक पुष्टि संभव है।
किन्हें ज्यादा खतरा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इन वर्गों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए इन्हें विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है:
- छोटे बच्चे
- बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
- तेज बुखार या ठंड लगना
- खांसी और गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- सिर और शरीर में दर्द
- अत्यधिक थकान और कमजोरी
- कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी
चेतावनी संकेत: सांस लेने में परेशानी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इसी तरह सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या लगातार तेज बुखार जैसे गंभीर लक्षण दिखने पर बिना देर किए अस्पताल पहुंचना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू का वायरस
चिकित्सकों के अनुसार यह संक्रमण मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा-ए (H1N1) वायरस के कारण होता है।
बचाव के लिए क्या करें
- खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें
- हाथों को बार-बार साबुन से साफ करें
- सर्दी-जुकाम से पीड़ित व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचें
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें
- इस्तेमाल किए हुए टिश्यू को खुले में न फेंकें
- लक्षण दिखने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें
इलाज संभव है, घबराने की जरूरत नहीं
राहत की बात यह है कि समय पर पहचान होने पर स्वाइन फ्लू का इलाज पूरी तरह संभव है। ज्यादातर मरीज डॉक्टर की सलाह और उचित देखभाल से ठीक हो जाते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटीवायरल दवा की सलाह भी देते हैं। सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा पहले से मौजूद है, ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि लक्षण दिखते ही देर न करें और नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं।
