उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले हेलीपैड निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है। प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में हेलीपैड के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को प्रदेश में 736 स्थानों पर हेलीपैड विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रदेश में हेलीपैड के लिए जमीन तो अधिकांश स्थानों पर उपलब्ध बताई जा रही है, लेकिन कई जगहों पर नागरिक उड्डयन विभाग के निर्धारित मानकों के अनुरूप भूमि नहीं मिल पा रही है। पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष के मुताबिक, जमीन उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का लक्ष्य है कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक हेलीपैड की व्यवस्था हो। इसके लिए औसतन हर 20 किलोमीटर की दूरी पर एक हेलीपैड विकसित करने की योजना है, ताकि हेलीकॉप्टर की आवाजाही में सुविधा हो और जरूरत पड़ने पर किसी भी क्षेत्र तक आसानी से पहुंचा जा सके।
मानकों के अनुरूप जमीन मिलने में आ रही दिक्कत
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर जमीन उपलब्ध होने के बावजूद नागरिक उड्डयन विभाग के मानकों के अनुरूप भूमि नहीं मिल पा रही है। अब तक 118 हेलीपैड के लिए मानक के मुताबिक जमीन चिह्नित की जा चुकी है। शेष स्थानों पर भूमि चिह्नित करने का काम जारी है।
मानकों के अनुसार हेलीपैड के लिए करीब 100 मीटर लंबी और आवश्यक चौड़ाई वाली जमीन की जरूरत होती है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर के सुरक्षित संचालन और उड़ान के लिए आसपास का क्षेत्र भी बाधारहित होना चाहिए। हेलीपैड के आसपास लगभग 250 मीटर तक खुला क्षेत्र रखने की आवश्यकता बताई गई है।
17 पुराने हेलीपैड भी होंगे दुरुस्त
नई व्यवस्था के साथ प्रदेश में पहले से मौजूद 17 पुराने हेलीपैड की मरम्मत और सुधार का काम भी कराया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जहां संभव होगा, वहां उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग कर हेलीपैड विकसित किए जाएंगे।
शासन का मानना है कि वीआईपी दौरे और आपातकालीन परिस्थितियों में हेलीपैड की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। हालांकि, चुनाव के दौरान अस्थायी हेलीपैड बनाने में होने वाले समय और धन के खर्च को देखते हुए पहले से स्थायी व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।
