9 सितंबर 2026 को वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का शुभारंभ किया। मां अन्नपूर्णा की नगरी काशी से शुरू हुए इस अभियान को प्रतीकात्मक रूप से भी खास माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर सदियों से पोषण और अन्नदान की परंपरा से जुड़ा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नवजात बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार कराया और बेटियों को गोद में लेकर खीर खिलाई। राधा-कृष्ण की वेशभूषा में पहुंचे बच्चों से भी मुलाकात कर उन्हें दुलार किया और खिलौने भेंट किए। इसके जरिए बच्चों, गर्भवती महिलाओं और माताओं के बेहतर पोषण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
पोषण माह क्या है
राष्ट्रीय पोषण माह, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित पोषण अभियान का ही एक वार्षिक हिस्सा है। यह मार्च 2018 में शुरू किए गए पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन) के अंतर्गत आता है, जिसका उद्देश्य बच्चों, महिलाओं और किशोरियों में कुपोषण, स्टंटिंग, एनीमिया तथा जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याओं को कम करना है।
हर वर्ष सितंबर महीने में मनाया जाने वाला यह अभियान केवल खाद्य आपूर्ति तक सीमित नहीं है। पोषण अभियान कुपोषण से निपटने के लिए एक अभिसरण-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी के साथ समुदाय को संगठित करना और व्यवहार परिवर्तन को जोड़ना शामिल है, क्योंकि यह माना गया है कि केवल खाद्य पूरकता से कुपोषण का समाधान संभव नहीं है। इसीलिए स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता, मातृ स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे कारकों को भी इसमें शामिल किया गया है।
इस वर्ष का पोषण माह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संशोधित पूरक पोषण कार्यक्रम (SNP) के नए दिशानिर्देशों और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के दस वर्ष पूरे होने के साथ आगे बढ़ रहा है — यह “सुपोषित भारत” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस वर्ष की थीम “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” रखी गई है, जिसके तहत पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास (Early Childhood Development) को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया जाएगा।
पोषण मेले में देश भर की पोषण परंपराओं की झलक
शुभारंभ कार्यक्रम के साथ ही रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में एक भव्य पोषण मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों की पोषण परंपराओं और आहार विविधता की झलक देखने को मिली। अलग-अलग राज्यों के पोषण आहार का रंग-रूप और बनाने का तरीका भले ही अलग रहा, लेकिन सभी में पोषण के तत्वों को प्राथमिकता दी गई।
मेले में कुल 15 पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी स्टॉल लगाए गए, जिनमें सात राज्यों — उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मिजोरम और बिहार — के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी योजनाओं और पोषण संबंधी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया। इसके अलावा अनुपूरक पुष्टाहार, ईसीसीई (प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा), सक्षम आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी गतिविधियों की भी प्रस्तुति दी गई।
मुख्यमंत्री योगी ने पोषण व्यवस्था में बदलाव पर दिया जोर
शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था और पोषाहार की गुणवत्ता में हुए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले आंगनबाड़ी केंद्रों और वहां मिलने वाले पोषाहार को लेकर गंभीर शिकायतें आती थीं, और जांच में पोषाहार की गुणवत्ता व नियमित आपूर्ति को लेकर भी खामियां सामने आई थीं। मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले व्यवस्था में लापरवाही साफ झलकती थी, जिसे सुधारने के लिए सरकार ने जवाबदेही और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया है।
अन्य संबंधित घोषणाएं और योजनाएं
राष्ट्रीय पोषण माह की पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश सरकार समय-समय पर आंगनबाड़ी और पोषण सुविधाओं से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं करती रही है, जिनमें प्रमुख हैं:
- हॉट कुक्ड मील योजना: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को गर्म पका भोजन (हॉट कुक्ड मील) उपलब्ध कराने की योजना अयोध्या से शुरू की थी, जिसके तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को गर्म पका भोजन मिल रहा है। इसके साथ ही ₹403 करोड़ की लागत से 35 जनपदों में 3,401 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का शिलान्यास भी किया गया।
- आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के लिए सुविधाएं: आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को “पोषण भी, पढ़ाई भी” किट उपलब्ध कराई गई है, और लाभार्थियों को पोषण थाली का वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में पूर्व में लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 45 जनपदों के 555 आंगनबाड़ी भवनों का लोकार्पण किया था और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं के बीमा प्रीमियम तथा यूनिफॉर्म के लिए 37 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि उनके बैंक खातों में भेजी थी।
- लाभार्थियों के लिए निगरानी उपकरण: बालिकाओं व लाभार्थियों के पोषण स्तर की सही पहचान और नियमित वृद्धि निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर इन्फेंटोमीटर, स्टेडियोमीटर, चाइल्ड वेइंग स्केल और एडल्ट वेइंग स्केल जैसे ग्रोथ मॉनीटरिंग उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
- किशोरियों व गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम: प्रदेश में किशोरी बालिकाओं तथा गर्भवती एवं धात्री (स्तनपान कराने वाली) महिलाओं के लिए भी विशेष पोषण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिन्हें लगातार अपग्रेड किया जा रहा है।
काशी से शुरू हुआ यह 9वां राष्ट्रीय पोषण माह पूरे सितंबर महीने चलेगा, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण जागरूकता सत्र, वृद्धि निगरानी शिविर, स्वस्थ व्यंजनों के प्रदर्शन और जन-जागरूकता रैलियों जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की थीम के साथ इस बार का अभियान आंगनवाड़ी केंद्रों को समुदाय की सक्रिय भागीदारी से और अधिक सशक्त बनाने पर केंद्रित है, ताकि “सुपोषित भारत” के लक्ष्य को गति मिल सके।
