लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की ओर से तैयार कराए गए जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) के संचालन का रास्ता अब साफ हो गया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में जेपीएनआईसी को निजी कंपनी को 35 साल की लीज पर देने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इसके लिए ओपन बिड के जरिए वृंदावन बॉटलर्स एंड रॉकवुड होटल्स के कंसोर्टियम का चयन किया गया है।
दो साल में पूरे करने होंगे बाकी काम
जेपीएनआईसी के संचालन से पहले परिसर में बचे हुए निर्माण और अन्य जरूरी कार्यों को पूरा करना होगा। इनमें इंटीरियर, इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी उपकरणों से जुड़े काम प्रमुख हैं। इन सभी कार्यों को चयनित कंसोर्टियम अपने खर्च पर अधिकतम दो साल के भीतर पूरा करेगा। इन कार्यों की अनुमानित लागत करीब 200 से 250 करोड़ रुपये बताई गई है।
अनुबंध की शर्तों के तहत कंसोर्टियम को 25 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी प्राधिकरण में जमा करनी होगी। वहीं, स्वीकृति पत्र जारी होने के बाद एलडीए की ओर से कंसोर्टियम को करीब 10.11 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।
हर साल मिलेगा करीब छह करोड़ रुपये राजस्व
जेपीएनआईसी का संचालन शुरू होने के बाद कंसोर्टियम की ओर से एलडीए को हर साल करीब 6 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। इस राशि में प्रत्येक वर्ष 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। निर्धारित लीज अवधि पूरी होने तक प्राधिकरण को इससे नियमित राजस्व प्राप्त होता रहेगा।
होटल, कन्वेंशन सेंटर और स्पोर्ट्स सुविधाओं का होगा संचालन
कंसोर्टियम को जेपीएनआईसी में निर्मित होटल, कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, पार्किंग और स्पोर्ट्स सुविधाओं के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं, परिसर में मौजूद म्यूजियम ब्लॉक के संचालन का अधिकार एलडीए के पास रहेगा।
जेपीएनआईसी के संचालन से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, कंसोर्टियम स्पोर्ट्स सुविधाओं में विभिन्न खेलों के लिए शुल्क ले सकेगा। हालांकि, इन सुविधाओं के लिए शुल्क की दरें मनमाने तरीके से तय नहीं की जाएंगी। इसके लिए गठित समिति की ओर से प्रभावी दरों का निर्धारण किया जाएगा।
ग्लोबल टेंडर के जरिए हुआ चयन
जेपीएनआईसी के संचालन के लिए एलडीए ने मार्च 2026 में ग्लोबल टेंडर जारी किया था। इसमें तीन बड़ी कंपनियों और कंसोर्टियम ने हिस्सा लिया। निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्राप्त निविदाओं का परीक्षण और मूल्यांकन करने के बाद वृंदावन बॉटलर्स एंड रॉकवुड होटल्स के कंसोर्टियम का चयन किया गया।
वृंदावन बॉटलर्स प्रदेश की प्रमुख बॉटलिंग कंपनियों में शामिल है और उसका सालाना टर्नओवर करीब 400 करोड़ रुपये बताया गया है। कंपनी का देश के साथ-साथ विदेशों में भी होटल कारोबार से जुड़ा अनुभव है।
35 साल बाद सरकार को वापस मिलेगा केंद्र
जेपीएनआईसी के निर्माण में करीब 821 करोड़ रुपये की लागत आई है। 35 साल की लीज अवधि समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार को वापस सौंप दिया जाएगा। दीर्घकालिक लीज व्यवस्था से जेपीएनआईसी के रखरखाव और संचालन का वित्तीय भार भी प्राधिकरण पर कम होगा।
एलडीए के मुताबिक, कंसोर्टियम को निर्धारित अवधि में बचे हुए कार्य पूरे करने के साथ-साथ जेपीएनआईसी का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना होगा। इससे लंबे समय से अधूरे पड़े इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के उपयोग में आने की उम्मीद बढ़ गई है।