लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार (15 सितंबर 2026) को हुई कैबिनेट बैठक में विकास और जनकल्याण से जुड़े 23 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें खिलौना उद्योग को बढ़ावा देना भी शामिल है। इसी बैठक में उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दी गई, जिससे प्रदेश में खिलौना निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नीति का उद्देश्य
इस नीति का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना, नए उद्योगों को प्रोत्साहित करना और टॉय क्लस्टर्स में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। नीति के माध्यम से प्रदेश में खिलौना निर्माण, विपणन और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा दिया जाएगा।
यूपी की खिलौना उद्योग में पहले से मजबूत पकड़
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, उत्तर प्रदेश विशेष रूप से खिलौना विनिर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। राज्य भारतीय पर्व-त्योहारों से संबंधित वस्तुओं (HS 9505) के निर्यात में लगभग 50 प्रतिशत योगदान करता है। वाराणसी, झांसी और चित्रकूट अपने जीआई टैग प्राप्त लैकवेयर तथा हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं। यह क्षेत्र कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार का अहम जरिया है।
प्रोत्साहन की संरचना
नीति के तहत खिलौना विनिर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। मौजूदा उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए भूमि एवं अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्यांचल क्षेत्रों में खिलौना उद्योग स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
MSME और बड़े उद्योगों के लिए अलग व्यवस्था:
- MSME वर्गीकरण के अनुसार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम श्रेणी की इकाइयों को उत्तर प्रदेश एमएसएमई प्रोत्साहन नीति-2022 (या उसकी उत्तरवर्ती नीति) के तहत निर्धारित प्रोत्साहन मिलेंगे।
- बड़े और उससे उच्च श्रेणी के उद्योगों को प्रस्तावित नीति के प्रावधानों के अनुसार प्रोत्साहन दिए जाएंगे, जिनका क्रियान्वयन इन्वेस्ट यूपी के माध्यम से होगा।
पात्र इकाइयों को निर्धारित प्रोत्साहन वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद प्रदान किए जाएंगे, और प्रस्ताव में फ्रंट एंड सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल हैं।
लागू रहने की अवधि
यह नीति प्रख्यापन की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक अथवा सरकार द्वारा नई नीति के प्रख्यापन तक लागू रहेगी। इसके तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने वाली परियोजनाएं राज्य सरकार की किसी अन्य नीति के तहत प्रोत्साहनों की पात्र नहीं होंगी, हालांकि भारत सरकार की योजनाओं के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन अतिरिक्त रूप से लिए जा सकेंगे।
नीति से अपेक्षित लाभ
- प्रदेश को खिलौना विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना
- पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, मध्यांचल में उद्योग स्थापना को बढ़ावा
- टॉय क्लस्टरों में रोजगार के नए अवसर
- कारीगरों, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों को आर्थिक अवसर
- MSME व बड़े उद्योगों के विस्तार और तकनीकी उन्नयन में मदद
अगर आपके पास “35 करोड़” वाली खबर का कोई लिंक या स्रोत है, तो बताइए — मैं उसे खोलकर सटीक आंकड़ा जांच सकता हूं, क्योंकि हो सकता है यह किसी विशेष इकाई-श्रेणी के लिए अधिकतम अनुदान सीमा जैसा कोई विशिष्ट प्रावधान हो जो अभी सार्वजनिक विस्तृत रिपोर्टों में शामिल नहीं है।
