प्रदेश की अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या कम करने और मामलों के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने 900 नए न्यायालयों की स्थापना का निर्णय लिया है। कैबिनेट बैठक में मंगलवार को पहले चरण में 900 नए न्यायालयों की स्थापना और उनके लिए आवश्यक पदों के सृजन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
इन नए न्यायालयों में 6,656 नियमित और 2,428 आउटसोर्स पदों का सृजन होगा। ये न्यायालय प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थापित किए जाएंगे। प्रस्ताव के तहत 237 अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, 391 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और 272 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर के न्यायालय शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, नए न्यायालयों की स्थापना की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में विभिन्न श्रेणियों की 9,149 अदालतों की आवश्यकता बताई थी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों और आवश्यकता के आकलन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से नए न्यायालयों का गठन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य न्यायालयों पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करना और लंबित मामलों के निस्तारण की गति बढ़ाना है।
