लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने आईटी सिटी योजना के लिए भूमि देने वाले किसानों, भू-स्वामियों और भू-धारकों को राहत देते हुए भूखंड आवंटन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। उपाध्यक्ष प्रेम कुमार के चार दिन पहले जारी आदेश के अनुसार, विकसित भूमि के बदले दिए जाने वाले आवासीय भूखंडों के आवंटन में अब अधिक लचीलापन रखा जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर आवंटियों को भी राहत मिल सकेगी।
25 प्रतिशत भूमि के बदले मिलेगा विकसित भूखंड
आदेश के मुताबिक आईटी सिटी योजना में भूमि देने वाले पात्र किसानों और भू-स्वामियों को उनकी 25 प्रतिशत भूमि के अनुपात में विकसित भूखंडदिए जाएंगे।
योजना में भूखंडों के लिए 35, 72, 128, 162, 200 और 288 वर्गमीटर के आकार निर्धारित किए गए हैं।
दो चरणों में होगा भूखंडों का चयन
एलडीए के नए नियम के अनुसार भूखंडों का चयन दो चरणों में किया जाएगा।
पहले चरण में उपलब्ध कुल क्षेत्रफल के आधार पर आवेदक को अधिकतम 288 वर्गमीटर तक का भूखंड आवंटित किया जाएगा। इसके बाद यदि कुछ क्षेत्रफल शेष रहता है तो दूसरे चरण में बची हुई भूमि के आधार पर उपयुक्त श्रेणी का भूखंड दिया जाएगा।
इसके लिए एलडीए ने अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं। उदाहरण के तौर पर:
- 35 वर्गमीटर तक शेष भूमि → 35 वर्गमीटर का भूखंड
- 35 से 72 वर्गमीटर तक → 72 वर्गमीटर
- 72 से 128 वर्गमीटर तक → 128 वर्गमीटर
- 128 से 162 वर्गमीटर तक → 162 वर्गमीटर
- 162 से 288 वर्गमीटर तक → 288 वर्गमीटर तक का भूखंड
अतिरिक्त जमीन का बोझ होगा कम
एलडीए के मुताबिक पहले कई भू-स्वामियों और किसानों की जमीन निर्धारित श्रेणी से थोड़ी अधिक होने के कारण उन्हें अगली श्रेणी का बड़ा भूखंड दिया जा रहा था। इससे उन्हें अतिरिक्त क्षेत्रफल की कीमत जमा करनी पड़ती थी, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ रही थी।
अब नई व्यवस्था में ऐसे आवंटियों को उनकी जमीन के अनुपात के हिसाब से उपयुक्त भूखंड देने का प्रयास किया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर आवंटियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
छोटे भूखंड लेने का रास्ता साफ
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पात्र आवंटियों को अब केवल बड़े आकार के भूखंड लेने के लिए अतिरिक्त राशि का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। छोटे आकार के भूखंडों के विकल्प उपलब्ध होने से अधिक लोगों को योजना का लाभ मिल सकेगा।
एलडीए का यह फैसला आईटी सिटी योजना में भूखंड आवंटन प्रक्रिया को अधिक लचीला और व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
