छत्तीसगढ़ के रायगढ़ स्थित एक स्टील कारखाने में लोहे से स्टील बनाने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले औद्योगिक कचरे स्टील स्लैग का इस्तेमाल कर दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग सड़क बनाई गई है। इस उपलब्धि को पर्यावरण के अनुकूल सड़क निर्माण और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। परियोजना को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।
करीब 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेन वाली इस सड़क के निर्माण में लगभग दो लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, स्टील स्लैग से बनी सड़कें पारंपरिक सड़कों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती हो सकती हैं। साथ ही, इनकी उम्र सामान्य सड़कों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक बताई गई है।
क्या है स्टील स्लैग?
स्टील स्लैग स्टील निर्माण की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला एक ठोस औद्योगिक उप-उत्पाद है। जब भट्ठी में लोहे को पिघलाकर स्टील बनाया जाता है, तो अशुद्धियां अलग होकर स्लैग के रूप में ऊपर तैरने लगती हैं। वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए इस स्लैग को प्रोसेस और ट्रीट कर सड़क निर्माण के योग्य सामग्री में बदला जाता है।
रायगढ़ में तैयार की गई सड़क इस बात का उदाहरण है कि औद्योगिक कचरे को उपयोगी निर्माण सामग्री में बदलकर न केवल कचरा प्रबंधन की समस्या को कम किया जा सकता है, बल्कि सड़क निर्माण की लागत और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी घटाया जा सकता है।
पारंपरिक सड़कों से क्यों बेहतर?
स्टील स्लैग से बनी सड़क की मजबूती और टिकाऊपन इसे पारंपरिक सड़क निर्माण सामग्री का एक विकल्प बनाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी सड़कें भारी बारिश, जलभराव और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। इसके अलावा, सड़क निर्माण में पत्थरों के खनन की आवश्यकता कम होने से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी मदद मिलती है।
स्टील स्लैग का उपयोग सड़क निर्माण में करना चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की अवधारणा को भी बढ़ावा देता है, जिसमें औद्योगिक कचरे को दोबारा उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया जाता है।
देश में स्टील स्लैग का बड़ा संभावित उपयोग
भारत में हर वर्ष लगभग 6 करोड़ टन स्टील स्लैग का उत्पादन होता है। इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्ध स्लैग का सड़क निर्माण में उपयोग होने पर देश में सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक पत्थरों और अन्य संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सकती है।
जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल ने भी कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के समन्वय से ऐसे उत्पादों को राष्ट्र निर्माण के लिए उपयोगी संसाधनों में बदला जा सकता है। स्टील स्लैग सड़क इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
भारत में पहले भी हो चुका है इस्तेमाल
स्टील स्लैग से सड़क निर्माण का प्रयोग भारत में पहले भी किया जा चुका है। देश की पहली स्टील स्लैग रोड सूरत, गुजरात में प्रायोगिक तौर पर बनाई गई थी। इसकी लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर थी। इसके अलावा मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग तथा अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पासभी स्टील स्लैग से बनी सड़कों का इस्तेमाल किया गया है।
दुनिया में कहां होता है इस्तेमाल?
स्टील स्लैग का सड़क निर्माण में इस्तेमाल केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका के ओहियो और पेंसिल्वेनिया सहित कई राज्यों में राजमार्ग निर्माण में स्टील स्लैग का उपयोग किया जाता है। वहीं यूरोप में जर्मनी, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे देशों में बेहतर पकड़, मजबूती और टिकाऊपन के लिए डामर में स्टील स्लैग मिलाया जाता है।
रायगढ़ की 1.85 किलोमीटर लंबी स्टील स्लैग सड़क इस बात का उदाहरण है कि औद्योगिक अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित कर बड़े पैमाने पर टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है।
