मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है।
राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर किसी भी तरह का कब्जा देश के लिए गंभीर विषय है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि चुनाव से जुड़े सवालों का समाधान केवल मतदान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा भी जरूरी है।
अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ममता बनर्जी का बंगाल चुनाव को लेकर आरोप
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। ममता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग भी दोहराई।
महाराष्ट्र में दोबारा मतदान की मांग पर बयान
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव रद्द कर दोबारा मतदान कराए जाने की मांग से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को उनके कथित रुख के लिए धन्यवाद देने की बात कही।
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को बताया बेबुनियाद
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक व्यवस्था के तहत काम करता है और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं।
चुनाव आयोग ने कहा—असहमति का मतलब टकराव नहीं
चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और आयुक्तों के बीच मतभेद से जुड़े विवाद पर सफाई दी। आयोग के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद को टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव अधिकारियों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में आंतरिक टिप्पणियों और फैसलों को सार्वजनिक किए जाने से संबंधित मुद्दों पर भी ध्यान दिया गया है।
40 नई पहल का दावा
आयोग ने बताया कि पिछले कुछ समय में चुनाव प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई नई पहल की गई हैं। इनमें मतदाता सूची के सुधार, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा अन्य प्रशासनिक सुधार शामिल हैं। आयोग का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता खुला है। नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के समक्ष भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे न्यायिक सुनवाई महत्वपूर्ण हो सकती है।
