केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में मंगलवार को छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के बीच यमुना नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर समझौता हुआ। इस समझौते के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बनने वाले बांध के पानी का बंटवारा किया जाएगा। परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया है और इसकी करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि भागीदार राज्यों द्वारा वहन किए जाने की बात कही गई है।
इस परियोजना से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को भी अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में दिल्ली को विभिन्न राज्यों से करीब 1000 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है, जबकि उसकी मांग लगभग 1250 एमजीडी है। किशाऊ परियोजना शुरू होने के बाद दिल्ली को अतिरिक्त पानी मिलने से राजधानी में पानी की कमी दूर करने में मदद मिल सकती है।
समझौते के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। केंद्र सरकार और संबंधित राज्य परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद इसका लाभ सभी भागीदार राज्यों को मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ जल उपलब्धता को भी बढ़ावा मिलेगा।
232.6 मीटर ऊंचा होगा बांध
किशाऊ बांध की ऊंचाई 232.6 मीटर और लंबाई करीब 680 मीटर होगी। इसके बनने के बाद लगभग 32 किलोमीटर लंबी झील का निर्माण होगा। परियोजना के तहत करीब 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संग्रहित किया जा सकेगा। इससे लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है।
परियोजना से यमुना नदी के प्रवाह को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। इससे सिंचाई और पेयजल के साथ-साथ बिजली उत्पादन की जरूरतें पूरी करने में सहायता मिल सकती है।
कहां बनेगा किशाऊ बांध?
किशाऊ परियोजना यमुना की सहायक नदी टोंस पर प्रस्तावित है। बांध उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पास, दोनों राज्यों की सीमा क्षेत्र में बनाया जाना है। किशाऊ गांव के नाम पर परियोजना का नाम रखा गया है।
परियोजना को आगे बढ़ाने में लंबे समय से भूमि और अन्य मुद्दे बाधा बने हुए थे। वर्ष 1994 में राज्यों के बीच समझौते की दिशा में पहल हुई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं को लेकर हुए विवादों के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। 16 जून को परियोजना पर औपचारिक सहमति बनने के बाद अब इसे आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।
चार राज्यों को मिलेगा पानी
परियोजना के तहत विभिन्न राज्यों के लिए पानी का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा को 5.71 बिलियन क्यूबिक मीटर, उत्तर प्रदेश को 3.71 बिलियन क्यूबिक मीटर, राजस्थान को 1.119 बिलियन क्यूबिक मीटर, उत्तराखंड को 0.311 बिलियन क्यूबिक मीटर और दिल्ली को 0.724 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलने का प्रावधान है।
परियोजना से कुल 13.24 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध होने का अनुमान है। इसमें सिंचाई के साथ-साथ अन्य जल आवश्यकताओं के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
यमुना की सफाई में भी मिलेगी मदद
किशाऊ परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यमुना के प्रवाह से जुड़ा है। परियोजना से नदी में पानी का प्रवाह नियंत्रित करने और जल उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली में यमुना की सफाई के प्रयासों को भी सहारा मिल सकता है।
यमुना नदी में लगातार जल प्रवाह बनाए रखना नदी की स्थिति सुधारने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। परियोजना से मिलने वाले पानी का इस्तेमाल पेयजल, सिंचाई, कृषि और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा।
2029 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने यमुना की सफाई के लिए 2029 तक का लक्ष्य रखा है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों और सरकार के अनुसार, यमुना में पर्याप्त और नियमित जल प्रवाह बनाए रखना नदी की सफाई के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समझौते के बाद किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है। परियोजना से दिल्ली सहित संबंधित राज्यों को पेयजल और सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलने के साथ बिजली उत्पादन और जल प्रबंधन को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
