केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना VB-G RAM G (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन, ग्रामीण) के लागू होने के ठीक पहले महीने में ही रोजगार सृजन के आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार सृजित हुआ, जो पिछले साल इसी महीने पुरानी योजना मनरेगा (MGNREGS) के तहत सृजित हुए 15.33 करोड़ पर्सन-डेज की तुलना में करीब 49.94 प्रतिशत कम है।
यह गिरावट ऐसे समय आई है जब सरकार ने दो दशक पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) से 1 जुलाई 2026 से नई योजना VB-G RAM G की ओर संक्रमण (ट्रांजिशन) किया है।
पिछले पांच वर्षों का जुलाई डेटा
| वित्त वर्ष | परिवार (Household) | पर्सन-डेज |
|---|---|---|
| 2022-23 | 1.75 करोड़ | 23.47 करोड़ |
| 2023-24 | 2.09 करोड़ | 27.14 करोड़ |
| 2024-25 | 1.62 करोड़ | 20.30 करोड़ |
| 2025-26 | 1.42 करोड़ | 15.33 करोड़ |
| 2026-27 | 68 लाख | 7.67 करोड़ |
आंकड़े बताते हैं कि योजना का लाभ लेने वाले परिवारों की संख्या में भी करीब 51 प्रतिशत की गिरावट आई है — यह घटकर 68.94 लाख रह गई है, जबकि पिछले साल मनरेगा के तहत यह आंकड़ा 1.42 करोड़ था। पिछले पांच वर्षों की तुलना में देखें तो जुलाई 2026 में योजना का लाभ लेने वाले परिवारों और सृजित पर्सन-डेज, दोनों ही सबसे निचले स्तर पर हैं।
आखिर VB-G RAM G है क्या
VB-G RAM G यानी “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)”, मनरेगा की जगह लागू की गई नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है। यह VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के तहत पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, मनरेगा से इस नई योजना में बदलाव की प्रक्रिया सुचारू और तकनीक-आधारित रही, तथा सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों ने योजना शुरू होने से पहले ही अपनी-अपनी योजनाओं को अधिसूचित कर पूरा प्रशासनिक व डिजिटल ढांचा तैयार कर लिया था।
VB-G RAM G, MGNREGA से कैसे अलग है
पुरानी मनरेगा योजना और नई VB-G RAM G योजना में कई अहम बदलाव किए गए हैं:
1. नाम और स्वरूप में बदलाव मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) की जगह अब योजना का नाम VB-G RAM G(विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन, ग्रामीण) कर दिया गया है, और यह एक नए कानून — VB-G RAM G अधिनियम, 2025 — के तहत संचालित हो रही है।
2. रोजगार गारंटी के दिनों में बढ़ोतरी मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में प्रति परिवार 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी। नई योजना VB-G RAM G में यह बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।
3. पीक सीजन में “पॉज़” (ठहराव) का नया प्रावधान नई योजना में एक अतिरिक्त प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत बुवाई और कटाई के पीक सीजन के दौरान एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिन तक योजना को स्थगित (पॉज़) किया जा सकता है। यह प्रावधान राज्यों द्वारा स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जुलाई में रोजगार सृजन में गिरावट की एक वजह खरीफ बुवाई के मौसम के दौरान योजना में हुआ यह ठहराव भी हो सकती है, हालांकि इस बारे में अभी कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है।
4. रिकॉर्ड बजट आवंटन योजना के निर्बाध क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा है, जो किसी भी ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के लिए अब तक का सबसे अधिक बजट है।
5. हाजिरी दर्ज करने की नई तकनीक अब उपस्थिति दर्ज करने के लिए NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) के जरिए फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है, साथ ही वास्तविक मामलों में जरूरत पड़ने पर तय अपवाद-प्रबंधन (exception-handling) व्यवस्था भी लागू है।
6. महिला भागीदारी नई योजना में अब तक सृजित कुल पर्सन-डेज में से लगभग 63 प्रतिशत महिलाओं का योगदान रहा है, जो कानून में तय एक-तिहाई की न्यूनतम अनिवार्य भागीदारी से काफी अधिक है।
सरकार का पक्ष
ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि योजना पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू हो रही है और रोजगार मांगने वाले 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों को काम दिया गया है। योजना लागू होने के पहले महीने में करीब 9 करोड़ पर्सन-डेज रोजगार सृजित हुआ और 1.33 करोड़ से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को उनकी मांग के अनुसार रोजगार दिया गया। देश भर में 9 लाख से अधिक सक्रिय वर्कसाइट्स के जरिए काम कराया जा रहा है, ताकि रोजगार की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। मंत्रालय के अनुसार, क्षेत्रीय अधिकारियों के दौरे, नियमित समीक्षा बैठकों, तकनीक-आधारित डैशबोर्ड और फील्ड-स्तर की फीडबैक व्यवस्था के जरिए योजना के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी की जा रही है।
गौरतलब है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़े और स्कीम डैशबोर्ड के आंकड़ों में कुछ अंतर भी देखा गया है — जहां डैशबोर्ड जुलाई में 7.67 करोड़ पर्सन-डेज दिखाता है, वहीं मंत्रालय के अनुसार पहले महीने में करीब 9 करोड़ पर्सन-डेज सृजित हुए।
मानसून और खरीफ बुवाई का असर
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में रोजगार सृजन में आई यह गिरावट कमजोर मानसून की पृष्ठभूमि में भी अहम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के 741 जिलों में से करीब 50 प्रतिशत जिलों में 1 जून से 3 अगस्त के बीच सामान्य से कम से लेकर काफी कम बारिश दर्ज की गई है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना असंगठित कृषि श्रमिकों के लिए एक फॉलबैक विकल्प बन जाती है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक खरीफ फसल के तहत 894.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई, जो पिछले साल इसी अवधि के 920.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में करीब 26.50 प्रतिशत कम है।
मांग पर असर पड़ने की आशंका
नई योजना भले ही अधिक मजदूरी और अधिक कार्य-दिवसों की गारंटी देती है, लेकिन रोजगार सृजन में आई तेज गिरावट ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती है, जो अर्थव्यवस्था को गति देने के लिहाज से अहम मानी जाती है। अनियमित मानसून के चलते खरीफ फसल का रकबा भी घटा है, जिससे समग्र कृषि उत्पादन के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है।