केन्द्र सरकार ने जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना (पॉपुलेशन एन्युमरेशन) के लिए 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा जब अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के साथ-साथ सभी जातियों की गणना की जाएगी। अब तक की जनगणनाओं में केवल एससी/एसटी से जुड़े आंकड़े ही जुटाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार यह दायरा पूरी आबादी तक बढ़ा दिया गया है।
दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल जनगणना
यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना माना जा रहा है। इस पूरी कवायद पर करीब 11,718 करोड़ रुपयेखर्च होंगे।
चरणबद्ध शुरुआत:
- जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त, 2026 से लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा।
- देश के बाकी हिस्सों में यह चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा।
- पहला चरण (मकान सूचीकरण) 30 सितंबर तक चलेगा, जिसमें घरों की सूची तैयार की जाएगी।
- कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घरों की सूची बनाने के लिए गणना कर्मियों ने 16 अप्रैल से ही घर-घर जाना शुरू कर दिया था।
- 1 से 20 जुलाई के बीच 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसका प्री-टेस्ट भी किया गया, जिसमें एससी/एसटी के अलावा अन्य लोगों से भी जाति पूछकर खुले कॉलम में दर्ज की गई।
2011 बनाम 2027 जनगणना: क्या बदला?
जनगणना 2011 (29 सवाल)
- एससी/एसटी की सूचना — नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति की जानकारी ली गई
- व्यक्ति से उसके धर्म के बारे में पूछा गया था
- शिक्षा और साक्षरता की जानकारी ली गई
- रोजगार, काम की श्रेणी, जगह के बारे में पूछा गया
- जन्म स्थान और माइग्रेशन से जुड़े सवाल
- यह प्रक्रिया फॉर्म-पेपर आधारित थी
जनगणना 2027 (40 सवाल)
- अब जाति भी पूछी जाएगी — केवल एससी/एसटी तक सीमित नहीं
- राष्ट्रीयता और पति-पत्नी की जानकारी भी ली जाएगी
- धर्म के साथ-साथ माता-पिता की जानकारी भी ली जाएगी
- डिजिटल साक्षरता और स्ट्रीम (शिक्षा) के बारे में पूछा जाएगा
- रोजगार के साथ-साथ काम की तलाश (बेरोजगारी) के बारे में भी सवाल होंगे
- मौजूदा प्रवास (माइग्रेशन) की अवधि भी दर्ज की जाएगी
- पूरी प्रक्रिया डिजिटल जनगणना पर आधारित होगी
जाति दर्ज करने का तरीका कैसे होगा?
अधिकारियों के अनुसार, जाति के लिए कोई पूर्व निर्धारित सूची या विकल्प नहीं होगा। यह एक खुला कॉलम होगा, और गणना कर्मी व्यक्ति द्वारा बताई गई जाति को उसी रूप में दर्ज करेंगे जैसा वह व्यक्ति बताएगा। यानी उत्तरदाता खुद अपनी जाति बताएगा और उसे शब्दशः दर्ज किया जाएगा, बजाय किसी पूर्व-निर्धारित सूची में से चुनने के।
किस तरह की जानकारी जुटाई जाएगी?
भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जनगणना अधिकारियों द्वारा पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया है। इनमें शामिल हैं:
- परिवार और व्यक्ति की सामाजिक जानकारी
- आर्थिक स्थिति से जुड़े सवाल
- शैक्षणिक पृष्ठभूमि (डिजिटल साक्षरता सहित)
- रोजगार और प्रवास (माइग्रेशन) से जुड़ी जानकारी
- पहचान से जुड़ी जानकारियां (जाति, राष्ट्रीयता, धर्म आदि)
यह कदम क्यों अहम है?
पहली बार पूरे देश की जातिगत संरचना का आधिकारिक और व्यापक डेटा सरकार के पास होगा, न कि केवल एससी/एसटी तक सीमित आंकड़े। इससे नीति-निर्माण, आरक्षण नीति, कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण में मदद मिलने की उम्मीद है। यह जनगणना पिछली जनगणना (2011) के करीब डेढ़ दशक बाद हो रही है, इसलिए इसके आंकड़े देश की मौजूदा सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को समझने के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
