साइबर ठगी और “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने सिम कार्ड जारी करने की पूरी प्रक्रिया को और सख्त बनाने का फैसला किया है। दूरसंचार विभाग अब डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म यानी DIP के जरिए ऐसे ग्राहकों की रियल टाइम में पहचान करेगा, जिनके नाम पर तय सीमा से ज्यादा मोबाइल नंबर चल रहे हैं। टेलीकॉम कंपनियों के साथ लंबी चर्चा के बाद तैयार किए गए इन नए प्रावधानों का मकसद एक ही है — फर्जी सिम के सहारे होने वाली डिजिटल ठगी पर लगाम कसना।
एक व्यक्ति कितने सिम रख सकता है?
मौजूदा नियमों के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति देश की सभी टेलीकॉम कंपनियों और सभी सर्विस एरिया को मिलाकर अधिकतम नौ मोबाइल कनेक्शन अपने नाम पर रख सकता है। हालांकि जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए यह सीमा काफी कम, यानी सिर्फ छह कनेक्शन, रखी गई है। दिक्कत यह थी कि अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग सर्विस एरिया में किसी एक ग्राहक के नाम पर कुल कितने नंबर एक्टिव हैं, इसका पता लगाना अब तक आसान नहीं था। नए नियम इसी खामी को दूर करने के लिए लाए गए हैं।
DIP प्लेटफॉर्म कैसे काम करेगा?
नए सिस्टम के तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाला ग्राहकों का डाटा एक जगह, यानी DIP पर इकट्ठा किया जाएगा। अलग-अलग कंपनी और सर्विस एरिया में किसी एक व्यक्ति के नाम पर लिए गए सारे कनेक्शन एक साथ जोड़कर देखे जाएंगे, ताकि यह तुरंत पता चल सके कि कौन ग्राहक तय सीमा पार कर चुका है।
23 अगस्त से DIP को उन ग्राहकों की तस्वीरें भी मुहैया कराई जाएंगी, जिनके नाम पर पहले से अधिकतम सीमा जितने कनेक्शन मौजूद हैं। टेलीकॉम कंपनियों को हर दिन ऐसी सभी फोटो डाउनलोड करनी होंगी, ताकि नया सिम जारी करने से पहले वे इसकी जांच कर सकें। इसका सीधा मकसद यही है कि सीमा से ज्यादा कनेक्शन रखने वाले किसी ग्राहक को गलती से भी एक और सिम जारी न कर दिया जाए।
नए ग्राहकों का रियल टाइम सत्यापन
अभी तक सिम खरीदने के बाद उसका सत्यापन कई बार देरी से होता था। अब नई व्यवस्था में इसमें बड़ा बदलाव किया जा रहा है:
- पहला चरण: टेलीकॉम कंपनियां ग्राहक द्वारा सिम लेने के अगले ही दिन उस कनेक्शन का सत्यापन कर सकेंगी।
- दूसरा चरण: इसके बाद कनेक्शन की बुकिंग और एक्टिवेशन के समय ही रियल टाइम में जांच अनिवार्य होगी।
- डेडलाइन: 30 नवंबर तक यह पूरी व्यवस्था देशभर में लागू हो जाएगी, यानी उसके बाद हर नया सिम लेते समय कंपनी को उसी वक्त सत्यापन करना होगा।
सीमा से ज्यादा सिम रखने वालों का क्या होगा?
नए प्रावधानों के तहत जब तक रियल टाइम जांच की व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक सीमा से ज्यादा सक्रिय कनेक्शन वाले ग्राहकों के अतिरिक्त कनेक्शन निलंबित कर दिए जाएंगे। यह निलंबन तब तक जारी रहेगा, जब तक ग्राहक खुद अतिरिक्त नंबर बंद नहीं करा देता। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नई व्यवस्था नए सिम लेने वालों तक सीमित नहीं है — दूरसंचार कंपनियों को अपने पुराने ग्राहकों के मामले में भी पूरी जवाबदेही निभानी होगी।
साथ ही, टेलीकॉम कंपनियों के लिए ग्राहक से लिया गया डाटा DIP को भेजना अनिवार्य कर दिया गया है, और किसी एक ग्राहक के नाम पर मौजूद सभी कनेक्शनों को DIP पर एक जगह समूहित किया जाएगा।
दुनिया के दूसरे देशों में सिम कार्ड के नियम
भारत अकेला देश नहीं है जो सिम कार्ड की पहचान को लेकर सख्ती बरत रहा है:
- रूस: सिम कार्ड के लिए नागरिकता कार्ड (इंटरनल रशियन पासपोर्ट) दिखाना अनिवार्य है।
- चीन: सिम कार्ड निवास प्रमाण पत्र के आधार पर जारी किया जाता है।
- अमेरिका: प्रीपेड सिम कार्ड लेना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन पोस्टपेड कनेक्शन के लिए आईडी के साथ-साथ क्रेडिट जांच भी होती है।
नए नियमों का मकसद क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो सरकार की कोशिश यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन किसी एक व्यक्ति के नाम पर सक्रिय न रहें, ताकि इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, फर्जी कॉल सेंटर या “डिजिटल अरेस्ट” जैसी ठगी के लिए न हो सके। DIP प्लेटफॉर्म, रियल टाइम सत्यापन और टेलीकॉम कंपनियों की बढ़ी हुई जवाबदेही — इन तीनों को मिलाकर सरकार फर्जी सिम के जरिए होने वाले डिजिटल अपराधों पर नकेल कसने की तैयारी में है।
