बुंदेलखंड की धरती हमेशा से अपनी ऐतिहासिक इमारतों, किलों और बेमिसाल जल प्रबंधन के लिए पहचानी जाती रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश की इस ऐतिहासिक विरासत के नाम अब एक और वैश्विक सम्मान जुड़ गया है। झांसी में बेतवा नदी पर बना लगभग 140 साल पुराना ‘पारीछा बांध’ अब आधिकारिक तौर पर विश्व धरोहर का हिस्सा बन गया है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्था ‘इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज’ (ICID) ने इस ऐतिहासिक बांध को वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर्स (WHIS) के रूप में मान्यता प्रदान की है।
अक्टूबर में फ्रांस में मिलेगा सम्मान
प्रदेश के प्रमुख सचिव (सिंचाई एवं जल संसाधन) अनिल गर्ग के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि का औपचारिक सम्मान अक्टूबर में फ्रांस में आयोजित होने वाली 26वीं ICID इंटरनेशनल कांग्रेस और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मीटिंग के दौरान दिया जाएगा। इस दौरान पारीछा बांध को प्रतिष्ठित WHIS अवार्ड-2026 से नवाजा जाएगा।
140 सालों से बुंदेलखंड की जीवनरेखा
19वीं सदी के उत्तरार्ध में निर्मित पारीछा बांध पिछले 140 वर्षों से बुंदेलखंड क्षेत्र की कृषि और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।
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बेतवा नहर प्रणाली: यह बांध बेतवा नहर प्रणाली का मुख्य स्रोत है, जिससे न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के बड़े कृषि भूभाग को भी सिंचाई का पानी मिलता है।
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बिजली उत्पादन में योगदान: इस बांध के जलाशय से झांसी स्थित पारीछा थर्मल पावर प्रोजेक्ट को लगातार पानी की आपूर्ति की जाती है, जिससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन सुचारू रूप से चलता है।
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पर्यटन का केंद्र: मानसून के दिनों में जब बेतवा के उफान के बीच बांध के गेट खोले जाते हैं, तो यहां बहता पानी और आसपास का प्राकृतिक नजारा बेहद सुंदर दिखाई देता है। यही वजह है कि यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट है।
अंग्रेजों के दौर में बनी यह इंजीनियरिंग संरचना आज सवा सौ साल से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी पूरी मजबूती के साथ खड़ी है और लाखों किसानों की जमीनों को सेराब कर रही है। ICID से मिला यह अंतरराष्ट्रीय दर्जा उत्तर प्रदेश के जल संरक्षण और ऐतिहासिक सिंचाई संरचनाओं की अहमियत को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश करता है।
