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Home»बिजनेस»सोना महंगा, ड्यूटी दोगुनी, आयात कैप — मोदी सरकार का ‘गोल्ड शॉक’ और उसके पीछे की पूरी कहानी
बिजनेस

सोना महंगा, ड्यूटी दोगुनी, आयात कैप — मोदी सरकार का ‘गोल्ड शॉक’ और उसके पीछे की पूरी कहानी

News DriftBy News DriftMay 16, 2026No Comments6 Mins Read
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सोना महंगा, ड्यूटी दोगुनी, आयात कैप — मोदी सरकार का ‘गोल्ड शॉक’ और उसके पीछे की पूरी कहानी
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15%नई इम्पोर्ट ड्यूटी (पहले 6%) / $72 BnFY26 में रिकॉर्ड सोना आयात  / 100 kgएक बार में अधिकतम आयात सीमा  / ₹1,300/gदो दिनों में सोने की कीमत में उछाल
PM मोदी की वो अपील जिसने हलचल मचा दी

कहानी शुरू हुई हैदराबाद के एक कार्यक्रम से, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक असाधारण अपील की — “अगले एक साल तक सोना मत खरीदिए।” उन्होंने ईंधन बचाने और विदेश यात्राएं टालने की भी बात कही। देश में हड़कंप मच गया।

“सोने के आयात में हमारी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। पहले युद्ध और संकट के समय लोग राष्ट्र के लिए सोना दान करते थे। अभी सोना दान करने की ज़रूरत नहीं — बस शादी-विवाह जैसे आयोजनों में सोने के गहने खरीदने से बचें।”

— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हैदराबाद, मई 2026

इसके महज तीन दिन बाद, 13 मई 2026 की आधी रात से, वित्त मंत्रालय ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। यह PM की अपील का नीतिगत रूपांतरण था।

नई नीति: क्या-क्या बदला?

धातु / श्रेणी पहले की ड्यूटी अब की ड्यूटी बदलाव
कच्चा सोना और चांदी (बेसिक) 5% 10% +5%
AIDC (कृषि विकास उपकर) 1% 5% +4%
कुल प्रभावी ड्यूटी 6% 15% +9%
सोने के पुर्जे (Parts) — 5% नया
UAE कोटा आयात रियायती बढ़ाई गई महंगा
IGST (अलग से) 3% 3% अपरिवर्तित

DGFT का 100 kg कैप (14 मई 2026): एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही आयात किया जा सकेगा। पहले कोई मात्रात्मक सीमा नहीं थी। इसके अलावा पहली बार आवेदन करने वाले को अनिवार्य भौतिक निरीक्षण झेलना होगा।

सोमवार (12 मई) — चेन्नई में 22 कैरेट₹14,100/ग्राम
बुधवार (13 मई) — ड्यूटी हाइक के बाद₹15,400/ग्राम (+₹1,300)
MCX पर सोना फ्यूचर्स उछाल+7.2% → ₹1,64,497 प्रति 10 ग्राम
चांदी की कीमत में एकदिनी उछाल+₹22,000/किलो
संकट की जड़: सोना भारत की अर्थव्यवस्था पर क्यों बोझ बन रहा है?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है (चीन के बाद)। हर साल सैकड़ों टन सोना विदेश से आता है — और इसके लिए भारी मात्रा में डॉलर बाहर जाते हैं। यह चक्र तीन बड़े संकट उत्पन्न करता है:

  • व्यापार घाटा: FY26 में सोने-चांदी का कुल आयात $102.5 अरब पहुंचा — कुल आयात का 14%। अप्रैल 2026 में व्यापार घाटा बढ़कर $28.38 अरब हो गया।
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव: फरवरी 2026 में $728 अरब के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर मई 2026 में $690 अरब — यानी मात्र 10 हफ्तों में $38.5 अरब की गिरावट।
  • रुपये की कमजोरी: 2021 में $1 = ₹74-75 था, अब ₹95 के करीब। रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शुमार।
  • बाहरी दबाव — US-ईरान युद्ध: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत के कच्चे तेल और LPG आयात पर भारी संकट। ब्रेंट क्रूड $73 से उछलकर $107/बैरल पर।

नोमुरा इंडिया का अनुमान: FY27 में भारत का भुगतान संतुलन 70 अरब डॉलर से अधिक के घाटे में जा सकता है। सरकार इसीलिए सोने जैसी “गैर-जरूरी” आयात पर लगाम लगाने पर मजबूर है।

इतिहास का आईना: पहले भी हो चुका है ऐसा
1962 — इंदिरा गांधी का युग
युद्ध के समय जनता से सोना दान करने की अपील। लोगों ने स्वेच्छा से आभूषण दान किए।
2013 — P. चिदंबरम (UPA सरकार)
चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के लिए सोने की आयात ड्यूटी बढ़ाई गई। तत्कालीन वित्त मंत्री ने भी लोगों से कम सोना खरीदने की अपील की थी।
2022 — रूस-यूक्रेन युद्ध
आयात ड्यूटी 15% तक बढ़ाई गई। बाद में 2024 के बजट में इसे 6% तक घटाया गया — ज्वेलरी उद्योग को बढ़ावा देने और तस्करी रोकने के लिए।
13 मई 2026
US-ईरान युद्ध, रुपये की गिरावट और रिकॉर्ड आयात के बीच — एक बार फिर ड्यूटी 15% पर वापस। यह वही फैसला जो 2024 में पलटा गया था।
उद्योग और उपभोक्ता पर असर:
ज्वेलर्स और उद्योग
जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग में 1 करोड़ से अधिक लोग सीधे रोजगार में हैं। GJC ने चेतावनी दी — ड्यूटी हाइक से ₹5 लाख करोड़ का उद्योग प्रभावित होगा और तस्करी बढ़ सकती है।
आम उपभोक्ता
शादी-ब्याह के लिए सोने की खरीदारी का सपना देखने वाले परिवारों पर सीधा असर। लखनऊ और अन्य शहरों में ज्वेलर्स ने विरोध-प्रदर्शन किया।
निर्यातक
100 kg की एडवांस ऑथराइजेशन सीमा से ज्वेलरी निर्यातकों को कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होगी — यह रत्न और आभूषण निर्यात पर बोझ बढ़ा सकता है।
निवेशक
सोना पहले से ही महंगा था, अब ड्यूटी बढ़ने से घरेलू कीमतें और ऊपर। डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और ETF की ओर रुझान बढ़ सकता है।
उद्योग की मांग: All India Gem & Jewellery Domestic Council के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा — “PM ने जो कहा वह राष्ट्रहित और देशभक्ति की दृष्टि से बिल्कुल सही है, लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार से संवाद हो और उद्योग को होने वाले नुकसान का समाधान निकाला जाए।”
सरकार की रणनीति: कीमत बाधा बनाम मात्रात्मक प्रतिबंध

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने “मूल्य-आधारित निरुत्साहन” (Price-based Disincentives) का रास्ता चुना है, न कि सीधे मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions)। इसका मतलब है कि सोना खरीदना अवैध नहीं है — बस महंगा कर दिया गया है।

  • चरण 1: PM की नैतिक अपील — लोगों की देशभक्ति की भावना जगाना।
  • चरण 2: आयात ड्यूटी 6% → 15% — कीमत बढ़ाकर मांग कम करना।
  • चरण 3: DGFT का 100 kg कैप — एडवांस ऑथराइजेशन का दुरुपयोग रोकना।
  • संभावित चरण 4: नोमुरा के अनुसार — इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य गैर-जरूरी आयात पर भी सख्ती संभव।

सरकार का तर्क: यदि स्वर्ण आयात में 30-40% की गिरावट आती है, तो देश के 20-25 अरब डॉलर बच सकते हैं। इससे चालू खाता घाटा कम होगा, रुपये पर दबाव घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा।

भारत में सोने का सांस्कृतिक महत्व: नीति बनाम परंपरा

सोना भारत में केवल निवेश या आभूषण नहीं है — यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक और भावनात्मक परंपरा है। विवाह में स्त्रीधन, त्योहारों पर खरीदारी, मंदिरों में चढ़ावा — सोना हर भारतीय परिवार की पहचान से जुड़ा है।

इसीलिए PM मोदी की अपील और सरकार का यह फैसला एक असाधारण राजनीतिक जोखिम भी है। आम जनता और ज्वेलर्स दोनों नाराज हैं — लेकिन देश की आर्थिक मजबूरियां भी उतनी ही वास्तविक हैं।

एक कठिन लेकिन जरूरी कदम?

भारत सरकार का यह ‘गोल्ड शॉक’ एक जटिल आर्थिक समीकरण का परिणाम है — बाहरी युद्ध का दबाव, गिरता रुपया, रिकॉर्ड सोना आयात और घटता विदेशी मुद्रा भंडार। नीति सही दिशा में है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों — खासकर उद्योग और छोटे व्यापारियों पर — को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

आगे क्या? सरकार और RBI इस नीति के प्रभावों की लगातार समीक्षा करेंगे। यदि स्थिति सुधरती है — रुपया मजबूत होता है और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ता है — तो भविष्य में ड्यूटी फिर घटाई जा सकती है (जैसा 2024 में हुआ था)। अभी के लिए, सोना खरीदना महंगा है — और शायद इरादा यही है।
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