कहानी शुरू हुई हैदराबाद के एक कार्यक्रम से, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक असाधारण अपील की — “अगले एक साल तक सोना मत खरीदिए।” उन्होंने ईंधन बचाने और विदेश यात्राएं टालने की भी बात कही। देश में हड़कंप मच गया।
इसके महज तीन दिन बाद, 13 मई 2026 की आधी रात से, वित्त मंत्रालय ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया। यह PM की अपील का नीतिगत रूपांतरण था।
नई नीति: क्या-क्या बदला?
| धातु / श्रेणी | पहले की ड्यूटी | अब की ड्यूटी | बदलाव |
|---|---|---|---|
| कच्चा सोना और चांदी (बेसिक) | 5% | 10% | +5% |
| AIDC (कृषि विकास उपकर) | 1% | 5% | +4% |
| कुल प्रभावी ड्यूटी | 6% | 15% | +9% |
| सोने के पुर्जे (Parts) | — | 5% | नया |
| UAE कोटा आयात | रियायती | बढ़ाई गई | महंगा |
| IGST (अलग से) | 3% | 3% | अपरिवर्तित |
DGFT का 100 kg कैप (14 मई 2026): एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत एक लाइसेंस पर अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही आयात किया जा सकेगा। पहले कोई मात्रात्मक सीमा नहीं थी। इसके अलावा पहली बार आवेदन करने वाले को अनिवार्य भौतिक निरीक्षण झेलना होगा।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है (चीन के बाद)। हर साल सैकड़ों टन सोना विदेश से आता है — और इसके लिए भारी मात्रा में डॉलर बाहर जाते हैं। यह चक्र तीन बड़े संकट उत्पन्न करता है:
- व्यापार घाटा: FY26 में सोने-चांदी का कुल आयात $102.5 अरब पहुंचा — कुल आयात का 14%। अप्रैल 2026 में व्यापार घाटा बढ़कर $28.38 अरब हो गया।
- विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव: फरवरी 2026 में $728 अरब के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर मई 2026 में $690 अरब — यानी मात्र 10 हफ्तों में $38.5 अरब की गिरावट।
- रुपये की कमजोरी: 2021 में $1 = ₹74-75 था, अब ₹95 के करीब। रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शुमार।
- बाहरी दबाव — US-ईरान युद्ध: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत के कच्चे तेल और LPG आयात पर भारी संकट। ब्रेंट क्रूड $73 से उछलकर $107/बैरल पर।
नोमुरा इंडिया का अनुमान: FY27 में भारत का भुगतान संतुलन 70 अरब डॉलर से अधिक के घाटे में जा सकता है। सरकार इसीलिए सोने जैसी “गैर-जरूरी” आयात पर लगाम लगाने पर मजबूर है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने “मूल्य-आधारित निरुत्साहन” (Price-based Disincentives) का रास्ता चुना है, न कि सीधे मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions)। इसका मतलब है कि सोना खरीदना अवैध नहीं है — बस महंगा कर दिया गया है।
- चरण 1: PM की नैतिक अपील — लोगों की देशभक्ति की भावना जगाना।
- चरण 2: आयात ड्यूटी 6% → 15% — कीमत बढ़ाकर मांग कम करना।
- चरण 3: DGFT का 100 kg कैप — एडवांस ऑथराइजेशन का दुरुपयोग रोकना।
- संभावित चरण 4: नोमुरा के अनुसार — इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य गैर-जरूरी आयात पर भी सख्ती संभव।
सरकार का तर्क: यदि स्वर्ण आयात में 30-40% की गिरावट आती है, तो देश के 20-25 अरब डॉलर बच सकते हैं। इससे चालू खाता घाटा कम होगा, रुपये पर दबाव घटेगा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा।
सोना भारत में केवल निवेश या आभूषण नहीं है — यह सदियों पुरानी सांस्कृतिक और भावनात्मक परंपरा है। विवाह में स्त्रीधन, त्योहारों पर खरीदारी, मंदिरों में चढ़ावा — सोना हर भारतीय परिवार की पहचान से जुड़ा है।
इसीलिए PM मोदी की अपील और सरकार का यह फैसला एक असाधारण राजनीतिक जोखिम भी है। आम जनता और ज्वेलर्स दोनों नाराज हैं — लेकिन देश की आर्थिक मजबूरियां भी उतनी ही वास्तविक हैं।
भारत सरकार का यह ‘गोल्ड शॉक’ एक जटिल आर्थिक समीकरण का परिणाम है — बाहरी युद्ध का दबाव, गिरता रुपया, रिकॉर्ड सोना आयात और घटता विदेशी मुद्रा भंडार। नीति सही दिशा में है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों — खासकर उद्योग और छोटे व्यापारियों पर — को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
