गोंडा। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण दिखाई देने लगा है। गोंडा जिले के खरगूपुर क्षेत्र में स्थित प्राचीन बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर भी इन दिनों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के सोमवार और अन्य महत्वपूर्ण तिथियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। खरगूपुर बाजार से पश्चिम दिशा में ऊंचे टीले पर स्थित यह प्राचीन मंदिर क्षेत्र की महत्वपूर्ण विरासतों में शामिल है। जिला प्रशासन के पर्यटन संबंधी विवरण और राष्ट्रीय मिशन ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड एंटीक्विटीज के अभिलेखों में भी मंदिर को महत्वपूर्ण निर्मित धरोहर के रूप में दर्ज किया गया है।
पांडवों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
पृथ्वीनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित विशाल शिवलिंग है। स्थानीय धार्मिक परंपरा और जनश्रुति के अनुसार इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से माना जाता है। मान्यता है कि पांडवों के वनवास के दौरान भीम ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी और शिवलिंग की स्थापना की थी।
हालांकि यह कथा धार्मिक मान्यता और स्थानीय परंपरा पर आधारित है। इसे प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय पौराणिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है। इसके बावजूद यह मान्यता लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का हिस्सा बनी हुई है।
विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विशाल शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय मान्यताओं और प्रकाशित विवरणों के अनुसार शिवलिंग का एक बड़ा हिस्सा जमीन के भीतर बताया जाता है। इसकी विशालता और प्राचीनता के कारण बाबा पृथ्वीनाथ धाम की पहचान दूर-दूर तक बनी हुई है।
मंदिर से जुड़ी एक अन्य स्थानीय जनश्रुति के अनुसार पृथ्वी सिंह नामक व्यक्ति को स्वप्न में जमीन के नीचे शिवलिंग होने का संकेत मिला था। इसके बाद खुदाई के दौरान शिवलिंग के प्रकट होने की कथा प्रचलित है। इसी जनश्रुति के आधार पर मंदिर के नाम को पृथ्वीनाथ से जोड़ा जाता है।
सावन में हर-हर महादेव से गूंजता है परिसर
सावन के महीने में बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर का वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
सावन के सोमवार को मंदिर में विशेष भीड़ रहती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पैदल, निजी वाहनों और अन्य साधनों से यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
महाशिवरात्रि सहित अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर भी यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। स्थानीय स्तर पर आसपास के जनपदों के साथ नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात सामने आती रही है।
धार्मिक पर्यटन की भी बड़ी संभावना
बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर गोंडा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्राचीन मंदिर, विशाल शिवलिंग और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इसे धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश, शौचालय, पार्किंग और यातायात जैसी सुविधाओं का बेहतर विकास किया जाए तो धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है।
आस्था और विरासत का संगम
बाबा पृथ्वीनाथ धाम की पहचान केवल यहां स्थापित विशाल शिवलिंग तक सीमित नहीं है। यह गोंडा की लोक आस्था, धार्मिक परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतिनिधित्व करता है।
सावन में जब श्रद्धालु हाथों में जल और पूजन सामग्री लेकर बाबा के दरबार की ओर बढ़ते हैं और मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है, तब पृथ्वीनाथ धाम गोंडा की धार्मिक आस्था का जीवंत स्वरूप दिखाई देता है।
यही वजह है कि सावन के महीने में बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि गोंडा की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत करती है।
शुचि पाण्डेय (गोंडा ब्यूरो)
