उत्तर प्रदेश ने बिजली उत्पादन के मोर्चे पर बीते एक दशक में जो रफ्तार पकड़ी है, उसका नतीजा अब आंकड़ों में साफ दिखने लगा है। प्रदेश में अब बिजली की जितनी जरूरत होती है, राज्य के पास लगभग उतनी ही, बल्कि कई बार उससे थोड़ी ज्यादा बिजली उपलब्ध रहने लगी है। यह बदलाव किसी एक साल में नहीं आया, बल्कि पिछले 12 वर्षों की लगातार कोशिशों का नतीजा है, जिसमें राज्य ने अपने कुल बिजली उत्पादन को करीब डेढ़ गुना तक बढ़ा दिया है।
एक दशक पहले की तस्वीर
साल 2014-15 में उत्तर प्रदेश में सभी स्रोतों से मिलाकर कुल 1,14,994.74 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होती थी। लेकिन उस समय प्रदेश को असल में जितनी बिजली की दरकार थी, वह कहीं ज्यादा थी — करीब 1,03,179 मिलियन यूनिट की मांग के मुकाबले राज्य के पास मुश्किल से 87,062 मिलियन यूनिट ही बिजली उपलब्ध हो पाती थी। यानी उस दौर में मांग और आपूर्ति के बीच का फासला काफी चौड़ा था, और आए दिन बिजली की किल्लत की खबरें आम बात हुआ करती थीं।
धीरे-धीरे पटती गई खाई
अगले कुछ वर्षों में यह अंतर लगातार सिकुड़ता गया। 2016-17 आते-आते उत्पादन बढ़कर 1,23,819.86 मिलियन यूनिट पहुंच गया, जबकि मांग और आपूर्ति का फासला भी काफी हद तक कम हो चुका था। इसके बाद हर साल उत्पादन में इजाफा होता रहा — 2019-20 में यह आंकड़ा 1,29,323.42 मिलियन यूनिट था, तो 2021-22 में बढ़कर 1,43,159.29 मिलियन यूनिट तक जा पहुंचा।
असली छलांग इसके बाद के वर्षों में देखने को मिली। 2022-23 में उत्पादन 1,63,447.06 मिलियन यूनिट रहा और अगले ही साल, 2023-24 में यह 1,65,051.58 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया। 2024-25 में यह आंकड़ा और आगे बढ़कर 1,75,196.84 मिलियन यूनिट हो गया, जो 2014-15 के मुकाबले लगभग डेढ़ गुना ज्यादा है।
2025-26 में मांग और आपूर्ति लगभग बराबर
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि 2025-26 में उत्तर प्रदेश का कुल बिजली उत्पादन 1,77,225.06 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया, जबकि इसी साल राज्य को 1,63,501 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत थी और उसके पास 1,63,475 मिलियन यूनिट बिजली मौजूद रही। यानी मांग और उपलब्धता के बीच का अंतर अब सिर्फ 26 मिलियन यूनिट तक सिमट आया है — जो पहले के मुकाबले नगण्य कहा जा सकता है।
इससे एक साल पहले, 2024-25 में भी यही रुझान देखने को मिला था। उस साल रोस्टर के हिसाब से आपूर्ति के लिए 1,65,090 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत थी और राज्य के पास 1,64,786 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध रही थी।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती तीन महीनों (अप्रैल से जून 2026) के आंकड़े भी इसी दिशा का संकेत देते हैं। इस अवधि में प्रदेश ने 50,641.98 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की, जबकि जरूरत 49,411 मिलियन यूनिट थी और उपलब्धता 49,401 मिलियन यूनिट रही।
संसद में केंद्र सरकार ने दिया हिसाब
यह आंकड़े अकेले राज्य सरकार के दावे नहीं हैं। हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने लोकसभा में उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्यों के बिजली उत्पादन और मांग-आपूर्ति से जुड़े आंकड़े पेश किए थे। केंद्र सरकार का कहना है कि बीते दो वर्षों में जरूरत के अनुपात में बिजली की उपलब्धता का अंतर लगभग खत्म हो चुका है, यानी अब प्रदेशों को जितनी बिजली चाहिए, करीब-करीब उतनी उन्हें मिल भी रही है।
बीते 12 साल की उपलब्धि एक नजर में
- 2014-15 में उत्पादन करीब 1 लाख मिलियन यूनिट के आसपास था
- 2025-26 में यह बढ़कर करीब 1.75 लाख मिलियन यूनिट के करीब पहुंच गया
- मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता का अनुपात लगातार बेहतर होता गया
कुल मिलाकर, बीते एक दशक से ज्यादा समय में उत्तर प्रदेश ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में जो प्रगति की है, उसने प्रदेश को उस स्थिति से बाहर निकाला है जहां हर साल मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा फासला रहता था। अब स्थिति यह है कि राज्य अपनी जरूरत के लगभग बराबर, और कई मौकों पर उससे भी ज्यादा बिजली पैदा करने में सक्षम हो चुका है।
