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Home»राष्ट्रीय»डिजिटल ग्रीन हाई-वे 2027 : हाईवे पर हादसा होते ही मिलेगा अलर्ट, 2027 से बदल जाएगा सफर का अनुभव
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डिजिटल ग्रीन हाई-वे 2027 : हाईवे पर हादसा होते ही मिलेगा अलर्ट, 2027 से बदल जाएगा सफर का अनुभव

NDMBy NDMAugust 25, 2026No Comments5 Mins Read
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डिजिटल ग्रीन हाई-वे 2027 : हाईवे पर हादसा होते ही मिलेगा अलर्ट, 2027 से बदल जाएगा सफर का अनुभव
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डिजिटल ग्रीन हाई-वे 2027: देश में नेशनल हाई-वे और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने का अनुभव अब पूरी तरह बदलने वाला है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए एक नई नीति तैयार की है, जिसके तहत भारत में 1 जनवरी 2027 से डिजिटल ग्रीन हाई-वे इंफ्रास्ट्रक्चर का नया दौर शुरू होगा। इस तारीख के बाद बनने वाला हर नया फोर लेन या इससे ऊपर का नेशनल हाई-वे और एक्सप्रेस-वे शुरुआत से ही अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक से लैस होकर तैयार होगा।

पूरा रोड नेटवर्क आएगा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर

इस योजना की सबसे बड़ी और अहम विशेषता यह है कि देश का समूचा रोड नेटवर्क एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा। इसका सीधा फायदा सड़क यात्रियों को मिलेगा — सफर के दौरान उनकी गाड़ी की डैशबोर्ड स्क्रीन या गूगल मैप्स, एनएचएआई ऐप जैसे जीपीएस ऐप पर मौसम, गति सीमा, ट्रैफिक की स्थिति और खाली चार्जिंग स्लॉट की जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध रहेगी। यानी सफर से पहले या रास्ते में किसी और साधन की जरूरत नहीं होगी, गाड़ी में बैठे-बैठे ही आगे के रास्ते की पूरी तस्वीर सामने आ जाएगी।

सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अगर हाईवे पर किसी वजह से हादसा हो जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत आसपास से गुजर रहे या पीछे आ रहे वाहन चालकों तक एडवांस अलर्ट के रूप में पहुंच जाएगी। अभी तक की व्यवस्था में हादसे या ट्रैफिक जाम की जानकारी घटना घटने के काफी देर बाद ही चालकों तक पहुंच पाती थी, जिससे कई बार पीछे से आ रहे वाहन बिना जानकारी के उसी जगह फंस जाते थे या दुर्घटना का शिकार हो जाते थे। नई व्यवस्था में एआई सिस्टम खुद पीछे आ रही गाड़ियों की स्क्रीनिंग कर उन्हें समय रहते अलर्ट भेज देगा, जिससे बड़े हादसों को टाला जा सकेगा।

टोल वसूली की शर्त भी होगी सख्त

मंत्रालय ने इस नीति में एक अहम शर्त भी जोड़ी है। एक जनवरी 2027 के बाद बनने वाले किसी भी नेशनल हाई-वे या एक्सप्रेस-वे को तब तक टोल टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं मिलेगा, जब तक कि उसे पूरी तरह एआई सर्विलांस और ईवी चार्जर से लैस करके प्रोविजनल कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (पीसीओडी) हासिल न हो जाए। यानी डेवलपर्स के लिए अब सिर्फ डामर और कंक्रीट की सड़क बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें हाईवे को डिजिटल और सुरक्षा मानकों पर भी खरा उतारना अनिवार्य होगा।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 2027 से बनने वाले हाई-वे और एक्सप्रेस-वे केवल डामर और कंक्रीट के रास्ते भर नहीं होंगे, बल्कि पूरे देश का रोड नेटवर्क एक केंद्रीय एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से जुड़ा होगा। इसका मतलब यह हुआ कि अलग-अलग हाईवे या एक्सप्रेस-वे पर मिलने वाला डेटा अब बिखरा हुआ नहीं रहेगा, बल्कि एक जगह इकट्ठा होकर पूरे नेटवर्क की निगरानी को आसान बनाएगा।

पुरानी और नई व्यवस्था में क्या है फर्क

सर्विलांस और निगरानी के मामले में अभी तक देश का हाई-वे नेटवर्क काफी हद तक असंगठित रहा है। पुराने और मौजूदा हाई-वे सामान्य सीसीटीवी कैमरों और मैन्युअल चेकिंग पर निर्भर करते हैं, जिससे किसी भी हादसे या गड़बड़ी की जानकारी मिलने में समय लगता है और निगरानी का दायरा भी सीमित रहता है।

इसके उलट, 2027 के बाद बनने वाले नए डिजिटल-ग्रीन हाईवे एआई थर्मल, एनपीआर (नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों और एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से लैस होंगे। इससे न सिर्फ हादसों या ट्रैफिक जाम की जानकारी तुरंत मिलेगी, बल्कि पूरे नेटवर्क की निगरानी भी काफी सटीक और तेज हो जाएगी।

हर 40-50 किमी पर मिलेगा अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग पॉइंट

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह नीति एक बड़ा कदम साबित होगी। वर्ष 2027 से बनने वाले नए एक्सप्रेस-वे पर हर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर 100 किलोवॉट क्षमता के अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए डेवलपर्स को हाई-वे की कुल निर्माण लागत का तीन से पांच फीसदी हिस्सा सिर्फ डिजिटल सर्विलांस, सेंसर ग्रिड और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना अनिवार्य होगा।

कोहरे, धुंध और अंधेरे में भी करेगा काम

इस पूरी व्यवस्था की एक और खासियत यह है कि यह सिर्फ अच्छे मौसम या दिन के उजाले तक सीमित नहीं रहेगी। कोहरे, धुंध या रात के अंधेरे जैसी विषम परिस्थितियों में भी काम करने वाले एआई-सक्षम थर्मल कैमरे सड़क पर तैनात रहेंगे। ऐसे हालातों में जहां सामान्य कैमरे सही तस्वीर नहीं दे पाते, वहां थर्मल तकनीक की मदद से बेहतर निगरानी संभव होगी और आगे के ट्रैफिक की जानकारी लगातार अपडेट मिलती रहेगी। सड़क पर कोई भी दुर्घटना होने पर एआई सिस्टम पीछे आ रही गाड़ियों की स्क्रीनिंग कर उन्हें तुरंत अलर्ट भेज देगा।

चार एक्सप्रेस-वे से होगी शुरुआत

यह पूरी योजना पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू की जाएगी। इसके लिए शुरुआत में चार बड़े एक्सप्रेस-वे को चुना गया है:

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे
  • गंगा एक्सप्रेस-वे
  • द्वारका एक्सप्रेस-वे
  • चारधाम ऑल-वेदर रोड

गौर करने वाली बात यह है कि नए बनने वाले प्रोजेक्ट्स पर यह पूरी व्यवस्था शुरू से ही सौ फीसदी लागू होगी, जबकि पहले से मौजूद पुराने टोल हाई-वे पर इसे रेट्रोफिटिंग मॉडल के जरिए यानी मौजूदा ढांचे में ही जरूरी तकनीकी बदलाव करके अपग्रेड किया जाएगा। इसके लिए एनपीआर कैमरे पूरे हाई-वे नेटवर्क पर तैनात किए जाएंगे, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में एआई सिस्टम तुरंत सक्रिय होकर पीछे से आ रहे वाहनों को समय पर आगाह कर सके।

कुल मिलाकर, मंत्रालय की यह नीति देश के हाई-वे नेटवर्क को महज सड़कों के जाल से आगे बढ़ाकर एक स्मार्ट, डेटा-कनेक्टेड और सुरक्षा-केंद्रित ढांचे में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिसका सीधा असर सड़क सुरक्षा और यात्रियों के अनुभव, दोनों पर पड़ेगा।

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