तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। इस आपदा में अब तक 160 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि प्रभावित इलाकों से करीब 750 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 142 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। लापता भारतीयों में से करीब 59 लोग कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए जा रहे थे। बाढ़ से नदी किनारे बसे गांवों में भारी नुकसान हुआ है। करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं, चार स्थायी और कई अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए। नेपाल सेना के 44 जवानों समेत 80 सुरक्षाकर्मी भी लापता हैं, वहीं करीब 341 विदेशी नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।
घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित एक आव्रजन केंद्र के चंद सेकंडों में मलबे और पानी की दीवार में तबाह होने का दृश्य दिखाई दे रहा है।
तिब्बत के भूकंप से आई जलप्रलय, हिमस्खलन बनी वजह
वैज्ञानिकों के अनुसार नेपाल में न तो तेज बारिश हुई थी और न ही मौसम खराब था, फिर भी बुधवार को यह जलप्रलय आई और सबकुछ तबाह हो गया। इसके पीछे तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंप को मुख्य वजह बताया जा रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि भूकंप के कारण हिमस्खलन हुआ, जिससे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण एजेंसी के अनुसार गोसाईंकुंडा से 47 किलोमीटर उत्तर में सुबह 8:37 बजे तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। माना जा रहा है कि इसी भूकंप के कारण नदी में बनी झील का बांध टूट गया, जिससे भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भारी बाढ़ आ गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार रसुवा में बीते 24 घंटे में सात मिलीमीटर से भी कम बारिश हुई थी। काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजन भक्त कायस्थ ने कहा कि हिमस्खलन ने तिब्बत के केरुंग इलाके में लेंडी नदी को अवरुद्ध कर दिया, जिससे नदी में झील बन गई और भारी मात्रा में पानी जमा हो गया। जब यह हिमनद फटा तो भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में बाढ़ आ गई।
वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कुछ अन्य वजहें भी बताई हैं — ग्लेशियर व ग्लेशियल झील के फटने से बाढ़ के हालात बनना, बर्फ के पिघलने या हिमस्खलन से नदी का जलस्तर अचानक बढ़ना, और पहाड़ का मलबा गिरने से बनी झील का दबाव बढ़ने पर अचानक टूट जाना।
काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक रिपोर्ट में चेतावनी जारी की थी कि हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में इस साल अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अत्यधिक भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के साथ-साथ ऊंचे तापमान के कारण ग्लेशियर और बर्फ तेजी से पिघल रहे हैं, जो तबाही को और बड़ा बना सकते हैं। गौरतलब है कि 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा जिले में आई अचानक बाढ़ की घटना के बाद आईसीआईएमओडी की रिपोर्ट को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
चीन पर आरोप लगा है कि उसने आपदा की सूचना नेपाल के साथ सही समय पर साझा नहीं की, बल्कि इसे 45 मिनट की देरी से दिया, जिससे काफी नुकसान हुआ। नेपाली समयानुसार तिब्बत के केरुंग काउंटी में यह बाढ़ बुधवार सुबह 8:15 बजे ही आ चुकी थी, लेकिन चीन की ओर से सूचना साझा न किए जाने से नेपाल को नुकसान उठाना पड़ा।
गांवों-बाजारों में तबाही, ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार डूबा
ढांडिंग, नुवाकोट, त्रिशूली नदी क्षेत्र, गोरखा, स्याफ्रूबेसी और तिमुरे इलाकों में भारी तबाही मची है। गांवों में कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गईं। विदुर नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 के अध्यक्ष लेनिन रंजित ने बताया कि रसुवा और नुवाकोट से होकर बहने वाली भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ के कारण नुवाकोट का ऐतिहासिक त्रिशूली बाजार लगभग पूरी तरह डूब गया। त्रिशूली जलविद्युत संयंत्र, बाजार में बने नए-पुराने दोनों कंक्रीट के पुल, त्रिशूली स्कूल, मंदिर और घर बह गए।
चश्मदीदों के अनुसार लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए, लेकिन मलबे और पानी में फंसकर कई लोग बह गए। कई श्रमिक जो अलग-अलग परियोजनाओं पर काम कर रहे थे, बाजारों, घरों और पर्यटक स्थलों पर मौजूद लोग जान बचाने के लिए भागे, लेकिन इस अचानक आई आपदा से बचने का मौका किसी को नहीं मिला। न तो तेज बारिश हुई थी, न बादल फटा था और न ही मौसम विभाग ने कोई पूर्व चेतावनी दी थी — महज 20 से 25 मिनट के भीतर ही सबकुछ तबाह हो गया। सोशल मीडिया पर तबाही के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोगों को जान बचाने के लिए भागते देखा जा सकता है। एक हाइड्रोपावर परियोजना पर अचानक बाढ़ से कई श्रमिकों ने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन बच नहीं पाए।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 77 तीर्थयात्री लापता
नेपाल-तिब्बत में आई इस भीषण बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे सैकड़ों श्रद्धालुओं को भी संकट में डाल दिया है। इस यात्रा पर गए करीब 400 श्रद्धालुओं से संपर्क टूट गया है, इनमें भारतीय व अन्य श्रद्धालु शामिल हैं, जिन्हें बुधवार को तिब्बत में प्रवेश करना था। टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स के अनुसार दोपहर तीन बजे तक इनमें से केवल कुछ ही लोगों से संपर्क हो सका था।
आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस बाढ़ से उनके कैलाश यात्रा समूह के 77 तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। उनके अनुसार वापसी के दौरान यह समूह इमिग्रेशन कार्यालय में था, तभी अचानक बाढ़ आ गई। सद्गुरु ने बताया कि उनकी कैलाश यात्रा से जुड़े 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, वहीं 743 लोग अभी भी तिब्बत में हैं और 148 लोग नेपाल में मौजूद हैं। इसके अलावा नेपाल के पोखरा में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और उनका प्रतिनिधिमंडल भी फंसा हुआ है, हालांकि टिकैत ने बताया कि उनके प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। नेपाल में धार्मिक यात्रा पर गए तमिलनाडु के 50 श्रद्धालु भी जलप्रलय में लापता हो गए, वहीं नेपाल दौरे पर गई केरल की 36 लोगों की एक टीम सुरक्षित बताई गई है। नेपाल में कमर्शियल बैंक की नौ शाखाएं भी बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हुई हैं।
कितने देशों के कितने लोग लापता
| देश | संख्या |
|---|---|
| भारत | 105 |
| नेपाली | 93 |
| एनआरआई | 37 |
| मलेशिया | 17 |
| ब्रिटेन | 12 |
| दक्षिण अफ्रीका | 04 |
| अमेरिका | 03 |
| ऑस्ट्रेलिया | 01 |
| नीदरलैंड | 01 |
नेपाल में फंसे भारतीयों की मदद के लिए विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 जारी किए हैं।
भारत ने भेजी राहत सामग्री, पीएम मोदी ने जताई संवेदना
भारत ने बुधवार रात सैन्य परिवहन विमान के जरिए राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के बीच बातचीत के कुछ घंटों बाद लिया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल के लिए 10 टन एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री तथा जरूरी दवाइयां भेजी हैं। राहत सामग्री को भारतीय वायुसेना के सी-130जे विमान से गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से बुधवार रात करीब 8:35 बजे काठमांडू के लिए रवाना किया गया। भारत आने वाले दिनों में नेपाल को और राहत सामग्री भेजेगा, और एक और सैन्य परिवहन विमान गुरुवार सुबह काठमांडू भेजे जाने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की और भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह ने पीएम मोदी की मदद और समर्थन के प्रति आभार जताया। गृह मंत्री अमित शाह ने भी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से राज्य में बाढ़ के खतरे को लेकर बातचीत की और संभावित संकट से निपटने के लिए केंद्र की ओर से पूरी मदद का भरोसा दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नेपाल में बाढ़ से हुए नुकसान पर दुख जताया। विदेश मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय सहित कई मंत्रालय मिलकर स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी नेपाल में हुई इस त्रासदी पर संवेदना व्यक्त की है।
नेपाल की बाढ़ के खतरे पर यूपी-बिहार में हाई अलर्ट
नेपाल में आई इस जलप्रलय का असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी दिखने लगा है। नेपाल के त्रिशूली और भोटेकोशी नदी क्षेत्रों में बादल फटने व भारी बारिश से आई बाढ़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रदेश के सीमावर्ती जिलों महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर में बाढ़ का असर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गंडक नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी को देखते हुए महराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। इस बीच बारिश से यूपी में 10 लोगों की मौत हो गई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा 24 घंटे में देने का निर्देश दिया है।
गोरखपुर में नेपाल में आई अचानक बाढ़ का पानी बिहार के साथ-साथ यूपी के सीमावर्ती जिलों में भी पहुंचने लगा है। यहां वाल्मीकिनगर बैराज पर पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है — रात आठ बजे 1.04 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज था, जो रात साढ़े नौ बजे बढ़कर 1,36,700 क्यूसेक और रात दस बजे 1,42,100 क्यूसेक हो गया, जबकि रात 11 बजे यह डिस्चार्ज 1,50,200 क्यूसेक तक पहुंच गया। इसके साथ ही हमीरपुर के मौदहा बांध के भी मूसलाधार बारिश के बीच सभी नौ गेट खोलने पड़े। यूपी के नागरिकों की मदद के लिए राहुल आयुक्त कार्यालय ने टोल फ्री नंबर 1070 जारी किया है, जिस पर सहायता की आवश्यकता होने पर संपर्क किया जा सकता है।
बिहार में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल में आई भीषण बाढ़ का पानी पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर बराज पर पहुंच गया है, जहां रात आठ बजे से पानी आना शुरू हुआ और रात 12 बजे तक बराज से 1.50 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। बाढ़ की आशंका को देखते हुए पश्चिम चंपारण के 10 प्रखंडों और पूर्वी चंपारण के आधा दर्जन प्रखंडों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के साथ प्रशासन ने गंडक किनारे बचाव और सुरक्षा उपाय तेज कर दिए हैं। नेपाल के देवा घाट से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद बराज पर ढाई लाख क्यूसेक पानी पहुंचने का अनुमान है, जिससे मुजफ्फरपुर और हाजीपुर तक असर पड़ने की आशंका है। हालांकि जल संसाधन विभाग के अनुसार पानी बढ़ने की गति फिलहाल धीमी है, और बराज से अधिकतम दो लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने का अनुमान है, जो गंडक व सहायक नदियों के जरिए उत्तर बिहार के अन्य जिलों तक पहुंच सकता है।
