नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र से हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के जिन तीन विषय विशेषज्ञों को अनुवाद कार्य सौंपा गया था, उन्होंने ही प्रश्नों को याद कर, संक्षेप में लिखकर और एनसीईआरटी की किताबों में संबंधित हिस्सों पर निशान लगाकर पेपर लीक करने में अहम भूमिका निभाई।
कोर्ट ने शुक्रवार को सीबीआई की दलीलें सुनीं। आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के लिए 10 अगस्त की तारीख तय कर दी गई है। इसी दिन तीनों आरोपियों की लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग पर भी कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
तीन विशेषज्ञ बने मुख्य आरोपी
सीबीआई के आरोपपत्र में एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञों — रसायन विज्ञान के पी.वी. कुलकर्णी, प्राणी विज्ञान व वनस्पति विज्ञान की मनीषा गुरुनाथ मंधारे और भौतिक विज्ञान की मनीषा संजय वाघमारे — को मुख्य आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने हाल ही में उस फास्ट ट्रैक कोर्ट के सामने आरोपपत्र दाखिल किया है, जो पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित तरीके अपनाने से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।
छोटी पर्चियों पर लिखे 135 सवाल
आरोपपत्र के मुताबिक जांच में सामने आया कि तीनों विशेषज्ञों को अनुवाद के लिए गोपनीय कक्ष के भीतर सादे कागज दिए गए थे। इनमें से पी.वी. कुलकर्णी ने इन्हीं कागजों का इस्तेमाल कर छोटी पर्चियों पर रसायन विज्ञान के सभी 135 सवाल और उनके उत्तर विकल्प संक्षेप में लिख डाले और उन्हें छिपाकर बाहर ले गए। कुलकर्णी को ही पूरे षड्यंत्र का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
वहीं वनस्पति विज्ञान की जिम्मेदारी संभालने वाली मनीषा संजय वाघमारे भी प्रश्नों को इसी तरह संक्षेप में लिखकर बाहर ले जाती थीं।
किताबों में निशान लगाकर लीक की जानकारी
आरोपपत्र में यह भी दर्ज है कि भौतिक विज्ञान के लिए एनटीए की मराठी अनुवादक रहीं मनीषा मंधारे होटल लौटने के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में जरूरी पैराग्राफ को चिह्नित कर देती थीं। दरअसल की तरह की सामग्री के साथ बार-बार काम करने के अनुभव के चलते वह आसानी से प्रश्नों को एनसीईआरटी की किताबों की सामग्री से जोड़ पाती थीं।
कैसे खुली पूरी साजिश
मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग के दौरान डिलीट किए गए व्हाट्सऐप चैट और लीक हुए प्रश्नों वाले पीडीएफ दस्तावेज बरामद हुए, जिनसे यह पूरी साजिश उजागर हुई। जांच में मिले 150 और 450 सवालों के सेट से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग और कोचिंग सेंटर का बायोमीट्रिक डाटा भी अहम सबूत साबित हुए। जांच एजेंसी को यह भी शक है कि पीडीएफ या हार्ड कॉपी के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उसकी कीमत तय करने का काम भी हुआ।
सुरक्षा में बड़ी चूक
आरोपपत्र में एनटीए की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बताया गया कि गोपनीय कक्ष में विशेषज्ञों के प्रवेश और निकास के समय उनकी कोई तलाशी नहीं ली जाती थी। वहां लगे कैमरों का बैकअप सिर्फ 20-25 दिनों का ही रखा जाता था और लाइव फीड की निगरानी के लिए कोई नियंत्रण कक्ष भी मौजूद नहीं था, जिस वजह से यह गतिविधियां लंबे समय तक पकड़ में नहीं आ सकीं। दिल्ली स्थित एनटीए मुख्यालय में सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए कोई अलग निगरानी कक्ष तक नहीं था।
प्रक्रिया में और कहां रह गईं खामियां
जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा के लिए अपनाई गई प्रक्रिया में कई विशेषज्ञों को एक से ज्यादा चरणों में शामिल किया गया था। इस वजह से समीक्षा चरण के दौरान इन्हीं विशेषज्ञों को अंतिम प्रश्न सेट तक पूरी पहुंच मिल गई। यह गड़बड़ी अनुवाद और पुनः अनुवाद, दोनों ही चरणों में देखने को मिली — यानी लीक रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था ही खुद कमजोर कड़ी बन गई।
लीक हुए सवाल बिचौलियों तक कैसे पहुंचे
आरोपपत्र के अनुसार इन विशेषज्ञों की गतिविधियां इसलिए पकड़ में नहीं आ सकीं क्योंकि दिल्ली स्थित एनटीए दफ्तर में सीसीटीवी फुटेज की निगरानी के लिए कोई विशेष नियंत्रण कक्ष नहीं था। यहीं से लीक हुए यह सवाल विशेषज्ञों के हाथों से होते हुए बिचौलियों और अन्य लोगों तक पहुंचाए गए। आरोपपत्र में यह भी जिक्र है कि अभ्यर्थियों के साथ बातचीत और लेन-देन करते हुए एक अन्य आरोपी मधुकर खैरनार ने पैसों के बदले प्रश्नपत्र मुहैया कराने के लिए अभ्यर्थियों से संपर्क किया था। सुरक्षा के तौर पर उनके शैक्षणिक दस्तावेज और एक खाली चेक भी लिया गया था, और लीक हुए प्रश्नों को आगे बांटने में शामिल लोगों से वह लगातार संपर्क में रहा।
अब तक 13 गिरफ्तारियां, हर छात्र से वसूले गए 12 लाख तक
जांच एजेंसी ने 13 मई से ही इस पूरे मामले में कार्रवाई शुरू कर दी थी। सबसे पहले राजस्थान से मंगलीलाल, दिनेश और विकास बिवाल को गिरफ्तार किया गया। इनके मोबाइल फोन में 29 अप्रैल को टेलीग्राम के जरिए भेजा गया लीक हुआ पीडीएफ मिला था। जांच के मुताबिक उसी दिन एजेंसी ने गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को भी पकड़ा।
13 मई को ही पुणे से धनंजय लोखंडे की गिरफ्तारी हुई। बताया गया कि सबूत मिटाने के लिए लोखंडे ने अपना फोन नष्ट करने की भी कोशिश की थी। अगले ही दिन पुणे से मनीषा संजय वाघमारे को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद 15 मई को पी.वी. कुलकर्णी को लातूर से, और 16 मई को पुणे से मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया। कोचिंग संचालक शिवराज मोतेगांवकर को भी 17 मई को लातूर से पकड़ा गया। इस तरह अब तक इस मामले में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
आरोपपत्र में बताया गया है कि प्रश्नों के बदले हर छात्र से करीब 12 लाख रुपये तक वसूले गए थे।
दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा संभव
सीबीआई ने आरोपियों पर जिन कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है, उनके मुताबिक दोष सिद्ध होने पर हर आरोपी को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान भी इसमें शामिल है।
अब सबकी निगाहें 10 अगस्त पर टिकी हैं, जब कोर्ट आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के साथ-साथ आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट को लेकर भी अपना फैसला सुनाएगी।
