UGC-NET परीक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जून में आयोजित UGC-NET परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों के बाद अब तीन विषयों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। इन विषयों में इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी शामिल हैं। री-टेस्ट 9 और 10 सितंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब डेढ़ लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है।
प्रश्नपत्रों में मिली थीं कई खामियां
जून में आयोजित UGC-NET परीक्षा के बाद इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। खास तौर पर सोशियोलॉजी के पेपर में स्पेलिंग, ग्रामर और ट्रांसलेशन से जुड़ी गलतियों की शिकायत सामने आई थी।
कुछ प्रश्नों में जाने-माने विचारकों और लेखकों के नाम तक गलत लिखे जाने की बात सामने आई। उदाहरण के तौर पर ‘Ritzer’ को ‘Putzer’, ‘Parsons’ को ‘Parsow’, ‘Churye’ को ‘Chunye’ और ‘A R Desai’ को ‘A K Desai’ छापे जाने का आरोप लगाया गया।
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रश्नों का हिंदी अनुवाद बेहद खराब था और कुछ सवालों में AI-generated सामग्री जैसी समस्याएं भी दिखाई दीं।
जांच के बाद रद्द करनी पड़ी परीक्षा
इन शिकायतों के बाद NTA की ओर से गठित विशेष समिति ने प्रश्नपत्रों की जांच की। समिति की जांच में पाया गया कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय बुनियादी नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था।
गड़बड़ियां इतनी अधिक थीं कि केवल कुछ सवाल हटाकर या उनमें मामूली सुधार करके प्रश्नपत्र को ठीक करना संभव नहीं था। इसी आधार पर NTA ने इन तीन विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया।
अब नई टीम तैयार करेगी प्रश्नपत्र
री-टेस्ट के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी नई टीम को दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिछली परीक्षा जैसी गलतियां दोबारा न हों।
इसके साथ ही भविष्य में UGC-NET जैसी परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए चार-स्तरीय जांच व्यवस्था (4-tier scrutiny) लागू की जा रही है। इसके तहत प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले कम से कम चार स्तरों पर जांचने की व्यवस्था होगी।
लाखों छात्रों के भरोसे से जुड़ा है मामला
UGC-NET देशभर में उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा है। ऐसे में प्रश्नपत्र में भाषा, तथ्य या अनुवाद संबंधी गंभीर गलतियां सामने आना केवल परीक्षा की प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे अभ्यर्थियों के भरोसे और परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।
री-टेस्ट और नई चार-स्तरीय जांच व्यवस्था का उद्देश्य आने वाली परीक्षाओं में इस तरह की गड़बड़ियों की संभावना को कम करना और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम करना है।
